मेरी माँ

09 मई 2021   |  शोभा भारद्वाज   (428 बार पढ़ा जा चुका है)

मेरी माँ

मेरी माँ

डॉ शोभा भारद्वाज

मेरी माँ 90 वर्ष पूरे कर चुकी हैं हम भारतीय के लिए हर दिन माँ पिता के सम्मान का दिन है हाँ आज विश्व मदर्स डे है . कुछ समय से मेरी अम्मा के हाथ में हर वक्त गीता रहती हैं गीता की हर टीका वह पढ़ चुकी हैं तुलसी कृत राम चरित्र मानस का सुंदर काण्ड का पाठ रोज करती हैं कहती हैं मैं अंतिम समय की तैयारी कर रही हूँ .पढ़ने की वह शुरू से शौकीन रही हैं हम उन्हें लायब्रेरी से किताबें ला कर देते थे पूरी किताब खत्म कर ही उन्हें चैन मिलता था पूरे परिवार का काम वह मुस्करा कर करती थी कभी खीजती नहीं थी .आज भी वह अपना काम स्वयं करती हैं किसी की तरफ मदद के लिए नहीं देखती आँखों के आपरेशन के बाद उनको पढ़ने लिखने में कोई परेशानी नहीं है ऊंचा सुनती हैं कानों की मशीन है परन्तु कभी नहीं लगाती वह अपना मोह तोड़ चुकी हैं हाँ अखबार शुरू से अंत तक पढ़ती है आज की राजनीति का बहुत अच्छा ज्ञान हैं हम उनकी बात सुनते हैं इशारे से बताते हम समझ रहे हैं अम्मा की आँखों के सामने चलचित की तरह बीते समय के चित्र घूमते हैं उनमें उनका अनुभव छिपा रहता है . उनका मायके का परिवार एक आदर्श परिवार था . मेरे चारो मामा फ्रीडम फाईटर थे नाना गणितज्ञ .उन दिनों ब्राह्मणों में संगीत ,ज्योतिष और आयुर्वेद सीखने का प्रचलन था नाना जी ने घर में सूरदास से अपने बच्चों को क्लासिकल म्यूजिक की शिक्षा दिलवाई मेरी अम्मा खूबसूरत स्वर में भजन गाती थी सुनने वाले विभोर हो जाते हैं आज भी आज भी अच्छा गाती हैं .अब मेरे मामा मसियों में वह अकेली जोशी परिवार की धरोहर हमारे पास हैं .

मेरी माँ और पिता ऐसा लगता था एक दूसरे के लिए बने हैं अम्मा उनके इशारों पर चलती थीं हैं उनमें कभी मैने विवाद होते नहीं देखा मेरे पिता जी साधारण परिवार से थे लेकिन उन्होंने पढाई में स्कूल कालेज में सदा रिकार्ड रिकार्ड बनाया . मेरे नाना को मेरे पिता बहुत पसंद आये उन्होंने रिश्ते की बात चलाई विवाह हो गया .मेरे पिता जी बहुत गोरे लम्बे हेंडसम थे . मेरी माँ दादी ने बहू को देखा घबरा गई उनके घुटनों तक लंबे भारी बाल गेहुआं रंग ख़ूबसूरत काली आँखें यह तो उनके बेटे को मोहित कर लेगी . बहुत अच्छे दिन थे अम्मा सख्त थी पिता जी नर्म और हमारी दादी, हम उन्हीं को अपनी माँ समझते थे .सुबह हम सब की आँख अम्मा के राग भैरवी गायन से खुलती कभी पिता जी भी उसमें सुर मिलाते अम्मा ने सबको हौबी में संगीत की शिक्षा दी थी मैं संगीत के मामले में बेसुरी हूँ .अम्मा की प्राथमिकता हमारी शिक्षा थी हम चार बहनें हैं अम्मा ने कभी बेटों बेटियों में फर्क नहीं किया दादी जी पुराने विचारों की थी उनके विरोध के बाद भी कोएजुकेशन में पढ़ने भेजा पढाई पूरी करने के बाद पी.एच .डी. करने दिल्ली भेजा गयी पढ़ाई के मामले में अम्मा बेहद सख्त थी वह साइंस के अलावा किसी विषय को विषय ही नहीं समझती मेरी शादी दिल्ली में हुई मेरे पति देव का वर्णन करते समय वह उनकी डिग्री बाद में बताती इनका इस तरह बखान करतीं वह पुलिस का डाक्टर है बहुत सख्त मिजाज सिद्धांत वादी है .पूरी तरह सिद्धांत वादी माँ .

मेरी माँ पिता जी में बहुत प्रेम था एक दिन मेरे पिता जिन्होंने कभी माँ के सामने पीठ नहीं मोड़ी थी ऐसी मोड़ी फिर कभी नही उठे . घर पर कैसा पहाड़ टूटा था बस हम जिन्दा रहे .पिता जी के लाडले बच्चे उन्हें सम्भालना आसान नहीं था किसी से मदद नहीं ली, सबने सिर जोड़ कर अम्मा के सुपरवीजन में बहुत मेहनत की उनका चलता स्कूल था आज नोएडा के सम्मानित लोगों की श्रेणी में आते हैं सब कुछ है बस नहीं हैं तो हमारे पिता जी अम्मा गजब की कर्मठ डूबता जहाज उनकी मेहनत और संयम से धीरे – धीरे पार उतरता गया . अम्मा को अपनी आगे की जेनरेशन की भी चिंता रहती है उनकी नजर में हम सख्त माता पिता हैं जबकि वह स्वयं सख्त थीं आज नानी पोते पोतियों की दादी उनकी दोस्त है आपको कौन सा खिलाड़ी पसंद है क्यों पसंद है बतायेगी ? पोतियों की प्यारी दादी उनकी स्कूल की पढ़ाई कैरियर का हिसाब रखती हैं . अब ऊंचा सुनने लगी हैं परन्तु उनकी हर बात समझ जाती हैं .बच्चियां घर से दूर पढ़ने गयीं कभी नहीं रोका .

कोरोना काल में अम्मा के लिए बेहद चिंता रहती है मेरी नींद खुल जाती है फिर नींद नहीं आती जीवन नश्वर है एक दिन अम्मा भी जायेंगीं लेकिन अम्मा जब तक हैं उन्हें कष्ट न हो . मैं अम्मा से ससम्मान जीने की कला सीख रही हूँ .उनकी हर बात पर गौर करती हूँ उन्हें डायरी में लिख लेती लेती हूँ.ऐसी कर्मठ माँ भाग्य से मिलती हैं

हमारे घर की चार पीढियां अम्मा . मेरी छोटी बहन , भांजी एवं उसकी बेटी .

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