यहूदियों के संहार की दास्तान .फिलिस्तीन का बटवारा

17 मई 2021   |  शोभा भारद्वाज   (450 बार पढ़ा जा चुका है)

यहूदियों के संहार की दास्तान, फिलिस्तीन का बटवारा

डॉ शोभा भारद्वाज

मुस्लिम समाज का पवित्र महीना रमजान लेकिन फिलिस्तीन के कट्टरपंथी संगठन ( हमास को आतंकी संगठन मानते हैं लेकिन योरोपीय संगठन की प्रमुख अदालत ने आतंकी संगठनों की सूची में हमास को रखने के फैसले को रद्द कर दिया है ) हमास' का मतलब है 'हरकत उल मुकवामा अल इस्लामियास।' यह फिलिस्तीन का सामाजिक-राजनीतिक आतंकवादी संगठन माना जाता है , जो मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में 1987 में स्थापित किया गया था इनका संघर्ष जेहाद’ इजरायल के खिलाफ है और इसका मकसद इसराइल से फिलिस्तीन की आजादी को सुरक्षित रखना है यह आत्मघाती हमलों के लिए भी जाना जाता है हमास के घोषणापत्र के अनुसार उनका आन्दोलन इजरायल का विनाश करेगा यह संगठन गाजा में स्थित है.

यहाँ हिजबुल्ला शिया ईरान सीरिया (अब नष्ट हो चुका है) भी अपना प्रभाव रखता है . ईरान में 11 फरवरी 1979 को इस्लामी क्रांति सफल हुई और एक हफ्ते बाद फिलिस्तीन लिब्रेशन फ्रंट के नेता यासिर आराफात को बुलाकर एक कार्यक्रम में फिलिस्तीनी दूतावास खोल दिया गया। फिलिस्तीन का दूतावास उसी इमारत में खोला गया जिसमें शाह की सरकार के समय इजराइल का दूतावास था ईरान के मौलाना इजरायल के विरोधी हैं .

इजरायल में इस समय राजनीतिक संकट है इसका फायदा उठा कर हमास की तरफ से इजरायल की तरफ निरंतर राकेट दागे गये उनकी संख्या 3000 के करीब हैं जिनमे 90 % आयरन डोम डिफेंस सिस्टम से नष्ट कर दिए गये इजरायल में जनता को चेतावनी देने के लिए निरंतर सायरन बज रहे हैं लोग सुरक्षित स्थानों की और भाग रहे हैं .आयरन डोम सिस्टम हेलीकाफ्टर एवं फाईटर प्लेन पर भी अटैक करता है इजरायल की तरफ से भी हवाई हमले किये गये मुख्य हमला गाजा स्थित मीडिया बिल्डिंग पर किया गया यहाँ अलजजीरा और एसोसियेट प्रेस जैसे मीडिया संगठनों के दफ्तर एवं निवास स्थान है इजरायली सेना ने हमले से पहले चेतावनी दी थी इमारत को एक घंटे के भीतर खाली कर दिया जाए मीडिया बिल्डिंग खाली कर दी गयी अत :जान का नुक्सान नहीं हुआ . इजरायल के अनुसार गाजापट्टी में आबादी के बीच हमास अपनी गतिविधियाँ चलाता है अनेक सुरंगों का जाल बिछाया गया है इन सुरंगों में हथियार रखे जाते है इनका इस्तेमाल हमास करता है इन्हे इजरायल के बम वर्षकों ने नष्ट कर दिया .अस्पताल के अंडर ग्राउंड में हमास के मुख्यालय है. गाजा पूरी तरह इनके नियन्त्रण में है अत :हथियारों का जखीरा इकठ्ठा करने राकेट दागने से किसी को एतराज नहीं है .इजरायल के बम वर्षक विमानों ने फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंपों पर भी हमले किये .

किसी रेस की तरक्की का राज जानना है उसका गुजरा कल अर्थात उनका इतिहास जानना चाहिए| यहूदियों का पूरा इतिहास उनके संहार और अपने स्थान से विस्थापित होने की दर्द भरी , संघर्षों से भरी दास्तान है . ऐसी कौम है जिस पर सबसे अधिक जुल्म हुए हैं .हिटलर के जर्मनी पर अधिकार करने के बाद यहूदियों के साथ ऐसा व्यवहार किया मानवता भी शर्मिंदा हो गयी. प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की परेशानी का कारण यहूदी हैं प्रचार कर उनकी नस्ल को नष्ट करने के लिए बकायदा ठेके उठते थे कौन कम खर्च में अधिक से अधिक यहूदी मार सकेगा जानवरों की तरह उन्हें ठूस-ठूस कर ट्रकों में भर कर लाया जाता फिर मरणासन्न स्त्री पुरुषों को गैस चेम्बरो में मरने पर विवश किया जाता , यहूदी सुन्न हो गये थे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी . उस समय के चित्रों में यहूदियों के शरीर नर कंकाल बने देखे जा सकते हैं केवल जर्मनी ही नहीं फ़्रांस, इटली ,रूस ,और पौलेंड में अत्याचार ही नहीं उनके धर्म पर बैन लगा दिया गया देख कर आश्चर्य होता है नर संहार से बची यहूदी नस्ल पत्थर बन गयी अब वह उस धरती पर लौटना चाहते थे जहाँ से उनको निकाला गया था .पुकार उठी हमारा वतन कहां है

दो ह्जार से वर्ष पूर्व इन्हें अपनी मातृभूमि फिलिस्तीन से निष्कासित होना पड़ा था . एक किवदन्ती है यहूदी कम्यूनिटी एशो आराम में इतने मस्त थे इन्हें अभिशाप के कारण अपनी जगह से पलायन करना पड़ा था भारत में भी यहूदी पहले केरल में बसे इसके बाद महाराष्ट्र में और यहीं के हो कर रह गये यह अब वे भारतीय हैं उन्होंने यहीं की भाषा अपना ली ,वह भारत को अपनी मदर लैंड मानते हैं इजरायल के जन्म के बाद उसको फादर लैंड इजरायल राष्ट्र के निर्माण के बाद बहुसंख्यक यहूदी भारत से इजरायल चले गये .

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हिंसात्मक बिद्रोह हो रहे थे इधर यहूदी माईग्रेशन बढ़ता गया तीन प्रतिशत यहूदियों की जनसंख्या 30 परसेंट हो गयी यहूदियों ने गरीब अरबों से जमीन खरीद ली इनके परिवार मिल कर खेती करते थे उनके खेतों के बीच यदि किसी फिलिस्तीनी का खेत आ जाता था उसे बेचने के लिए दबाब डालते लोकल लोगों और यहूदियों के झगड़े बढ़ने लगे अरबों के शस्त्र धारी भी ब्रिटिशर पर हमला कर रहे थे योरोप में यहूदियों का संहार और उनका पलायन देख कर ब्रिटिशर ने ऐसा उपाय निकालने की कोशिश की जिससे अरब और यहूदी दोनों सहमत हो सकें. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन कमजोर हो चुका था वह अपने उपनिवेशों को कब्जे में नहीं रख सकता था संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा फिलिस्तीन को बाँट दिया जाये विभाजन दो राज्यों में होना था संयुक्त राज्य संघ ने 1947 में विभाजन स्वीकार कर लिया लेकिन येरुसलम पर फैसला नहीं हो सका वह संयुक्त राष्ट्रसंघ के आधीन रहा . मई 1948 को ब्रिटेन ने फिलिस्तीन के दो हिस्से 1.इजरायल 2. फिलिस्तीन किये उसकी सेनायें वापिस लौट गयीं 14 मई 1948 को ‘इजरायल’ ,एक यहूदी राष्ट्र की स्थापना हुई. दुनिया भर से यहूदी युवक युवतियां हाथ पकड़ कर अपने राष्ट्र का उत्थान और विकास में योगदान देने आने लगे प्राचीन कहानियों में वर्णित इजरायल क्या वैसा था ?धूल भरी आंधियां तम्बुओं में लोग पड़े थे लेकिन उनके मन में उत्साह मजबूत राष्ट्र के निर्माण की इच्छा शक्ति थी विश्व में कहीं भी यहूदी रहता हो उसके लिए नेशनलिटी की कोई परेशानी नहीं थी आज भी नहीं है लेकिन इजरायल के आसपास बसे देशों को बटवारा मंजूर नहीं था .


इजरायल में येरुशलम -एक ऐसा शहर है जिसका इतिहास यहूदियों ,ईसाईयों और मुस्लिमों के विवाद का केंद्र है यहूदियों का विश्वास यहाँ एक शिला की नीव रखी गयी थी यहाँ से दुनिया का निर्माण हुआ था यहाँ कभी पवित्र मन्दिर था किंग डेविड का टेंपल जिसे रोमन आक्रमण कारियों ने नष्ट कर दिया बची पश्चिमी दीवार उस टेम्पल की निशानी है लाखो तीर्थ यात्री दीवार के पास खड़े होकर रोते और इबादत करते दिखाई देते हैं .

ईसाई समुदाय का विश्वास है यहाँ ईसा को सलीब पर चढ़ाया गया था इस स्थान को गोल गोथा भी कहते हैं यहाँ ईसा ने पुन: जन्म लेकर सरमन दिये थे . ईसाई समाज यहाँ के लिए बहुत संवेदन शील है .

मुस्लिम समाज के लिए भी यह स्थान अति समवेदन शील है यहाँ डोम आफ रॉक और मस्जिद अल अक्सा है यह इस्लाम धर्म की तीसरी पवित्र मस्जिद इसे मुसलमान बेहद पाक मानते हैं उनका विश्वास है यहीं से पैगम्बर मुहम्मद स्वर्ग जा कर वापिस आये थे और अपने समकालीन अन्य धर्मों के पैगम्बरों से मिले थे . मुस्लिम समाज रमजान के हर जुम्मे को इकठ्ठे होकर नमाज पढ़ते हैं . येरुसलम पर सभी हक जमाते हैं विचारकों के अनुसार मिडिल ईस्ट में पनपे यह तीनो सेमिटिक रिलीजन है.

विपरीत हालातों में घिरा राज्य विषम परिस्थिति में स्वाभिमान के साथ खड़ा है जिसके खिलाफ आँख उठाने में दुश्मन डरते हैं

यहूदी जहाँ रहे वहीँ की भाषा अपना ली लेकिन इजराईल ने हिब्रू को राष्ट्र भाषा के रूप में अपनाया है यह इनकी प्राचीन भाषा है सभी प्रार्थनाओं में हिब्रू का प्रयोग किया गया था लेकिन दैनिक जीवन में हिब्रू का प्रयोग में लाना मुश्किल था यहूदी भाषा को विस्मृत कर चुके थे .भाषा को फिर से जीवित करने वाले महानुभाव का नाम एलिजर बेन यहूदा था यह रशिया में जन्में थे हिब्रू में दूसरी भाषाओं के शब्दों का प्रयोग कर इसे समृद्ध बनाया जाये और इसकी डिक्शनरी बनायी जाये उनका प्रयत्न रंग लाया 14 मई 1948 को इजराईल का उदय हुआ हिब्रू राज भाषा पद पर सम्मानित की गयी जबकि यहाँ अरबी का भी चलन है लगभग 16 % अरबी लोग रहते हैं लेकिन अपनी भाषा स्वाभिमान जगाती है .

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