गृहस्थी का मूल पिता है ' फादर्स डे के अवसर पर '

19 जून 2021   |  शोभा भारद्वाज   (391 बार पढ़ा जा चुका है)

गृहस्थी का मूल पिता है  ' फादर्स डे के अवसर पर '

गृहस्थी का मूल पिता है

फादर्स डे के अवसर पर मनीष रामरक्खा द्वारा अपने स्वर्गीय पापा श्री सुभाष रामरक्खा जी को भावभीनी श्रद्धांजली .कविता में वर्णित सभी गुण उनके पापा में विद्यमान थे .

मूल है घर गृहस्थी का ,आकाश सा विस्तार है |

रीढ़ बन कर जो खड़ा है ,साथ निज परिवार है |

हंस जैसी चातुरी है ,ज्ञान – गुण धर्म व्यवहार है|

है वही सच्चा पिता जो ,सत्कर्म निष्ठावान है |

है वही सच्चा पिता जो ........

जन्म निज सन्तान देकर ,क्या पिता बनता कोई |

नाम देकर अपना उसे ,क्या फर्ज होता पूरा कभी |

प्यार अपना जो लुटा दे,त्याग मय जीवन बिताकर |

हो जिसे अभिमान खुद पर ,श्रेष्ठ उत्तम नर बना कर|

है वही सच्चा पिता जो ...............

जो करे उपकार जग का ,गुणमयी नागरिक बना कर |

मानवीय गुण दे कर सदा,निस्वार्थ जीवन बिता कर |

स्वप्न जो देखे सदा , उत्तम भविष्य सन्तान का |

सत्यप्रद निज कर्म कर ,आदर्श बने परिवार का |

है वही सच्चा पिता जो ......

दूरदर्शी भावना से खुद ,करे निर्माण निज सन्तान का |

प्रेम का सागर बहा कर , दे मार्ग जो कल्याण का |

बन कर हितैषी साथ दे, परमार्थ भाव और प्रेम का |

गर्व सारा जग करे उस , प्रेम का गौरवमयी भगवान का

है वही सच्चा पिता जो .....

परिचय -- मनीष रामरक्खा , आस्ट्रेलिया

सपुत्र --श्रीमती मनीषा राम रक्खा

Retired Senior Education Officer

At Present, Hindi Lecturer- The University of Fiji

गृहस्थी का मूल पिता है  ' फादर्स डे के अवसर पर '

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