दो सोने की दीनारें

02 जुलाई 2021   |  शोभा भारद्वाज   (377 बार पढ़ा जा चुका है)

दो सोने की दीनारें

दो सोने की दीनारें

डॉ शोभा भारद्वाज

सोमदत्त जी के मित्र अखबार में उनकी शादी के विज्ञापन के लिए उचित शब्द ढूंढ रहे थे लेकिन सोमदत्त जी की शर्त थी महिला ज़िंदा दिल एवं हंस मुख होनी चाहिए, कई महिलाओं ने सम्पर्क किया सोमदत्त जी मिलने भी गये सभी बुझी हुई लगी उनके पास अपने रोगों की चर्चा अधिक थी किसी के घुटने काम नहीं करते थे कुछ डायबटीज एवं ब्लड प्रेशर की मरीज थी कुछ अपने माता-पिता के साथ रहती थीं उन्हें ऐसा पति चाहिए था जो उनके घर में रहे. एक लडकी ने अपनी विशेषतायें बताने के बजाय सीधे मिलने को कहा सोमदत्त जी अबकी बार बिना सज्जा के बिना उत्सुकता के लड़की के बताये गये रेस्टोरेंट में पहुंचे .

कुछ ही देर में सलवार सूट पहने एक महिला उन्हें हवा में उड़ती आती दिखाई दी उसको देखने के बाद उसकी उम्र का अनुमान लगाना मुश्किल था उसने सोमदत्त जी को देखा पहचानने के बाद हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ते हुये पूछा आप मिस्टर सोमदत्त हैं न मैं स्नेहा . सोमदत्त जी कालेज लाईफ में पहुंच गये ऐसा लगा जैसे किसी लड़की के साथ वह डेट पर आये है उन दिनों शादी के लिए उनके अपने सपने थे . दोनों कोने की टेबल खाली देख कर कुर्सियों पर बैठ गये .कुछ देर सोचते रहे काफी मंगाई पीते – पीते महिला ने स्वयं कहा सामने पार्क हैं वहीँ चलते हैं पार्क की एक बेंच पर दोनों बैठ गये स्नेहा के बताया मैं फला बैंक में मैनेजर हूँ और परिचय क्या दूँ ?आपके सामने बैठी हूँ एक वर्ष बाद रिटायर होने वाली हूँ . कभी शादी के बारे में नहीं सोचा था व्यस्त रहती हूँ रिटायर्मेंट के बाद अकेलेपन से भय लगा सोचा शादी कर लूँ .

सोमदत्त बोले मेरा परिचय मेरे विज्ञापन में था मुझे हैरानी है आपकी शानदार नौकरी आकर्षक व्यक्तित्व है आपने शादी नहीं की , वह हँसने लगी दिल्ली की हूँ पढ़ने का बहुत शौक था बैंक के लिए सिलेक्ट हो गयी सवाल है शादी क्यों नहीं की या क्यों नहीं हुई ? माँ पापा के मेरी शादी के विषय में सपने थे अधिकारी बेटी के लिए आईएएस या आईपीएस वर खोजा जाये शादी के लिए जब बरात आये लोग हैरान रह जाएँ धीरे -धीरे उम्र बढ़ती गयी जो वर मेरे पापा को पसंद आता था वह मुझे पसंद नहीं करते थे जो मुझे पसंद करते थे वह माँ पापा को पसंद नहीं आते .सोमदत्त जी ने पूछा आपकी पसंद क्या थी कभी पापा ने पूछा ही नहीं .दो भाई हैं मुझसे छोटे उनकी शादी हो गयी वह खिलखिला कर हंसी घर का स्टेट्स बढ़ता गया परिवार का शानदार जीवन था महंगी कलौनी में कोठी बनी बैंक के लोन की मोटी किश्ते मेरी तनखा से कटने लगीं मैं अपने काम में व्यस्त रहती थी शादी के लिए आये रिश्तों की चर्चा होती उसी रिश्ते में कमियाँ निकाल कर रिजेक्ट कर दिया जाता घर में भतीजे , भतीजियों की चहल पहल रहती थी समय का पता नहीं चला .एक दिन माँ ने आँखें मूंद ली , पापा अकेले पड़ गये मैं ही उनकी साथी थी उन्हें अफ़सोस था बेटी का कन्यादान नहीं कर सका कुछ वर्ष बाद उनके नाम के आगे स्वर्गवासी लग गया .

समाज एवं सगे सम्बंधियों में मेरी भाभियों का बहुत सम्मान था सब कहते ननद को कोई लड़का पसंद नहीं आता था नकचढ़ी नन्द है तब भी कितने प्यार से सम्भाला है .यह कहानी मेरी ही नहीं दिल्ली में कमाने वाली अनेक लड़कियों की है . भतीजियों की शादी हो गयी भतीजे के रिश्ते आ रहे हैं पता नहीं क्यों अचानक महसूस होने लगा मैं अकेली हूँ मै स्वयं शादी के विज्ञापन देखने लगी आप पहले हैं जिनको मैं समझने अपने बारे में समझाने आई हूँ हाँ मैं शादी जरूर करूँगी इतना तय है .मेरी मोटी पगार बैंक लोन में कट जाती है बैंक बैलेंस कुछ नहीं है .

अब सोमदत्त जी की बारी थी ,मैं माता पिता का अकेला बड़ा बेटा हूँ मेरी दो छोटी बहने है पिताजी की साधारण नोकरी थी मैं पढ़ने में अच्छा था रुड़की से इंजीनियरिंग पास की पिता जी ने मेरा रिश्ता तय कर दिया मैने विरोध किया माँ पिताजी ने दबाब डाला, इमोशनल ब्लैकमेलिंग की मेरा ब्याह हो गया अच्छा खासा पैसा नकद लिया दो सोने की दीनारें होने वाले ससुर जी ने शादी तय होने के बाद मुझे पेशगी में दी. लड़की देखने में सुंदर थी माँ ने कहा क्या तू अपने लिए ऐसी लड़की और परिवार ढूंढ सकता था उन्होंने मुझे मौका ही नहीं दिया था हाँ मैं नौकरी लगने के बाद पाँच वर्ष तक शादी नहीं करता .शादी हो गयी अच्छा जीवन चल रहा था मेरे पिता जी ने तुरंत बहनों का रिश्ता तय कर जो पैसा मेरी शादी में आया था दोनों बेटियाँ के सुसराल वालों को लगन में नकद दे दिया और दहेज का सामान भी जिसका पत्नी को दुःख था उसे खोल कर भी देखने नहीं दिया, वह बहनों के दहेज में चला गया . ‘दो दीनारें’ रिश्ता तय होने के बाद दोनों दामादों के हाथों में एक –एक रख दी .

माँ पिता जी दूरदर्शी थे वह समझ चुके थे बेटे की पत्नी के साथ उनका गुजारा नहीं हो सकता फिर मेरी कीमत भी उनको अच्छी मिली थे वह अपने गावँ चले गये उनकी पेंशन थी मुझे उनको कुछ देना नहीं था ..मेरी पत्नी को जब तक ज़िंदा रहीं मलाल था बड़े चाव से लाये गये दहेज के सामान. पैसा और ‘दो दीनारें’(गिन्नियाँ) रिश्ते की शुरुआत में चली गयीं थी . मायके एवं सुसराल से दो नथें चढ़ी थीं ,बहुत भारी एवं सुंदर थी उनमें से एक तुड़वा कर एक दामाद की अंगूठी बनवा दी गयी नथ का भी गम था .

हमारे दो लड़के हैं दोनों इंजीनियर मैने अपनी कमाई से 200 गज जमीन पर तीन मंजिला कोठी बनवाई परन्तु मैडम का दुःख और बढ़ गया मायके से मिले नकद रुपयों से उन दिनों जमीन सस्ती थी 500 गज जमीन पर हमारी कोठी बनती . मैं दो बार दो – दो वर्ष के लिए डेपुटेशन पर मिडिल ईस्ट गया पत्नी के लिए 24 कैरेट के आभूषण लाया लेकिन दो दीनारें और एक नथ के तुड़वाने का गम खत्म नहीं हुआ .बेटों का ब्याह किया दोनों बहुयें मैं पढ़ी लिखी साधारण घरों से चुन कर लाया एक पोती तीन पोते हैं पत्नी की इच्छानुसार हम नीचे के हिस्से में रहते हैं दोनों बेटे ऊपर की मंजिलों में उन पर मैडम का रोब चलता था सास के तानों से बचने के लिए बहुओं ने नौकरी कर ली मैडम को ब्लड प्रशर था बहुत समझाने पर दवाई अपनी मर्जी से खाती थी फालिज हो गया बिस्तर पकड़ लिया . नर्स थी उनको पसंद नहीं थी उनकी सेवा मैं ही करता था .पोते पोतियों का नौकरी के साथ ध्यान रखना उनका होम कराना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था .खाना मेरी पत्नी की इच्छानुसार सबके लिए साथ बनता है बाई है मैडम बिस्तर पर सहारे से उठती बैठती है लेकिन जीवन के अंत तक उन्हें अपना दहेज याद रहा .उनके जाने के बाद बेटों को मैने अपने हिसाब से जीने के लिए कहा मैं झूठ नहीं कहूंगा मैं हंसना भूल चुका था सात वर्ष वह बिस्तर पर रहीं मृत्यू के बाद वह रोग शोक से मुक्त हो गयीं मुझे कुछ सकून मिला उनकी मृत्यू को दो वर्ष हो चुके हैं .

मेरे दोस्तों को मैडम के जीते जी कभी मेरे घर से चाय नहीं मिली उन्होंने मुझे समझाया तेरी जल्दी शादी हो गयी थी शादी की जिन्दगी अच्छी नहीं रही अब वक्त बदल गया है शादी कर लो मेरिज आफ कन्विनियंस . मेरे बेटों के सामने कहा वह लाल पीले हो गये उन्होंने समाज की दुहाई दी बहुओं ने दबी जुबान से कहा आप बच्चों का ध्यान रखिये उनके कैरियर निर्माण में आपकी जरूरत पड़ेगी परन्तु मै अब कोल्हू के बैल जैसी जिन्दगी से निकल कर हंसना चाहता हूँ .मेरी एक ही शर्त हैं मुझे जिंदादिल पत्नी चाहिए .

दोनों कुछ देर चुपचाप बेठे रहे फिर एक साथ खिलखिला कर हंसे अब रोज शाम को सोमदत्त जी स्नेहा के बैंक जाकर उससे मिलने लगे कुछ देर घूमते कभी बाहर से खा कर अपने अपने घर चले जाते . मित्रों ने शादी का शुभ महूर्त निकाल कर शादी का दिन तय कर दिया दोनों बहू बेटों को शर्म आ रही थी वह अपने पोर्शन में ताला लगा कर बच्चों सहित कुछ दिन के लिए चले गये लेकिन पड़ोसियों एवं समाज को कोई एतराज नहीं था उन्होंने सोमदत्त जी को जिन्दगी की गाड़ी खींचते देखा था स्नेहा के घर से कोइ भाई भतीजा भांजा नहीं आया .स्नेहा दुल्हन की तरह तैयार हुई सोमदत्त जी को दूल्हे का लिवास पहनाया , मंत्रोच्चार के साथ फेरे हुये स्टेज पर उन्हें बिठाया बहुत अच्छी दावत दी गयी उनके एक मित्र ने स्टेज पर खड़े होकर पूछा क्या हमने यह विवाह करवा कर कोई गलती की सबने तालियाँ बजाकर विवाह का स्वागत किया मित्रों ने उन्हें हनीमून के लिए गोवा भेजा खर्च सबने मिल कर किया .वह पन्द्रह दिन के बाद लौट कर आये दोनों खिलखिला कर हंस रहे थे दोनों का एक जैसा स्वभाव था उनको सब ‘हंसो का जोड़ा’ कहने लगे उनके घर से हंसी ख़ुशी की आवाज आती थी दोनों रिटायर हो गये थे .

बेटे लौट आये उन्होंने समझदारों को बुलाकर पंचायत बुलाई पापा को उनके कर्त्तव्य समझाये उनका जबाब था मेरी अब कोई जिम्मेदारी नहीं है मैं अब जिम्मेदारियों से रिटायर हो चुका हूँ बस इससे अधिक कुछ नहीं शाम को दोनों घूमने निकलते . सोमदत्त जी दो दीनारों के बंधन से ऐसे बंधे थे एलटीसी मिलता था पत्नी कहीं जाने को तैयार नहीं थी वह अब भारत भ्रमण के लिए जाने लगे स्नेहा सोमदत्त जी का इतना ध्यान रखती थी वह उम्र से कम नजर आने लगे लोग उनके प्यार के उदाहरण देते थे .अब वह मरना नहीं चाहते थे लंबी उम्र तक जीना चाहते थे ऐसा लगता है इनमें से एक गया दूसरा भी साथ चला जाएगा.उनके मित्र अक्सर उनके घर आते ख़ुशी लेकर जाते थे .

18 वर्ष हंसी ख़ुशी में बीत गये पोते पोतियों की अपने दादा से पहले से दोस्ती थी वह स्नेहा को बड़ी मम्मा कहने लगे दोनों उनको गाईड करते, एक दिन दोनों लड़के उनके पास आये उनके साथ उनकी पत्नियों के पिता थे . शिष्टाचार के बाद वह बैठ गये आपसे कुछ बातें करनी है बोलिये आपका विवाह नैतिकता के विरुद्ध था . क्यों ? पत्नी की मृत्यू के बाद आपके बड़े बच्चे थे वानप्रस्थ की उम्र में विवाह करना क्या उचित था ? कल आप बच्चों से सेवा की आशा भी नहीं रखना ,कोई बात नहीं हममें से जब एक रह जाएगा वह वृद्धाश्रम चला जाएगा तो अभी चले जाईये या गावँ चले जाईये .आप नीचे का हिस्सा सम्भाले हुए हैं बच्चे बड़े हो रहे हैं उनकी शादी विवाह भी करने हैं . सोमदत्त जी ने मुस्करा दिए बेटो दरवाजा खुला है जाईये आप अपने लिए सुविधाजनक घर बनवा लीजियेगा. जाईये हमें और भी बहुत काम है .एक दिन आपकी मृत्यू होगी क्या घर साथ ले जायेंगे घर यहीं रहेगा इसे हम वृद्धाश्रम बना देंगे .अब क्या जबाब देते चले गये .

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