नाज मेरी बच्ची

05 जुलाई 2021   |  शोभा भारद्वाज   (408 बार पढ़ा जा चुका है)

नाज मेरी बच्ची

डॉ शोभा भारद्वाज

यह किस्सा वर्षों से मेरे जेहन में छाया हुआ था यह किस्सा मेरी पाकिस्तान की पठान मित्र ने सुनाया था जिसे आज तक मैं भूल नहीं सकी वह आर्मी में डाक्टर थे रैंक कर्नल का था उनकी ख़ूबसूरत पत्नी नाम शहनाज था ऊपर वाले का दिया सब कुछ था लेकिन औलाद के लिए दोनों तरसते थे उम्र बढ़ती जा रही थी हर इलाज करवाया हर दर पर सिजदा किया मन्नतें मांगी सब बेकार डाक्टर साहब की दो वर्ष के लिए पोस्टिंग सुउदिया हो गयी .दो वर्ष पूरे कर वह स्वदेश लौटना चाहते थे अचानक पत्नी उल्टियाँ करने लगी टेस्ट करवाया हैरानी हुई पत्नी उम्मीद से थी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, स्वदेश लौटे लाहौर में उनके भाई की कोठी के पास खाली कोठी मिल गयी तुरंत खरीद ली इन्ही दिनों छोटे भाई के घर बेटी हुई उनके पहले तीन लड़के थे बेटी का नाम हिना था बड़ी शानदार दावत दी गयी . कुछ समय बाद डाक्टर साहब के घर भी प्यारी सी बेटी ने जन्म लिया बेहद खूबसूरत तीखे नैन नक्श नाजुक एक नाम सूझा नाज सबको पसंद आया .

दोनों बच्चियां साथ बड़ी होने लगी उनके लिए स्कूल ? शहनाज को अपना पब्लिक स्कूल जहाँ वह पढ़ी थी पसंद आया परन्तु वह यह सोच कर बेचैन थी बच्ची को स्कूल कैसे भेजूंगी कुछ देर के लिए भी बच्ची से अलग होना पति पत्नी को पसंद नहीं था . दोनों भाईयों के बीच वाली कोठी खाली थी एक दिन कोठी के सामने ट्रक रुका उस पर से सामान उतारा जा रहा था सामान के नाम पर महंगे कालीन एवं कांच का बेशकीमती सामान था .ट्रक से एक बूढ़ा माली, कार से मालकिन नाम था रजिया दो नौकरानियां उतरी रजिया अपने समय में बेहद खूबसूरत रही होगी लेकिन इतनी बूढ़ी नहीं थी जितना दिखती थी .

शिष्टाचार के नाते शहनाज ने जब तक सामान उतरता है अपने ड्राईंग रूम में बैठने के लिए बुलाया . महिला बहुत लंबी सलीका बहुत मनमोहक था जब बोलती थीं उनकी सुराहीदार गर्दन से शब्द फिसलते लगते थे . शहनाज देखती रह गयी . कुछ ही देर में इतनी अपनी हो गयी लगा वर्षों की जान पहचान है नाज ने रिश्ता गाँठ लिया बड़ी अम्मी . शाम को डाक्टर साहब घर आये सुना बहुत अच्छी पड़ोसन पड़ोस में रहने आयीं हैं सभी खुश हुए .हिना ,नाज दोनों बड़ी अम्मी से घुल मिल गयी उनकी कोठी के बाग़ में आम का पेड़ था जिसकी लंबी डाल पर दो झूले डाल दिये गये . माली अपने काम में लग गया उसने मौसमी फूल लगा कर एक दो महीने में उजाड़ कोठी की सूरत बदल दी. घर के बाहर करीने से लाईट लगाई गयीं कोठी की खूबसूरती देखने लायक थी. बड़ा ड्राईंग रूम में शानदार कालीन बिछे थे दीवार के सहारे रेशम के कालीन से मढ़ी सहारे के लिए पुश्तियाँ एवं गाव तकिये लगाये गये .कीमती कांच के खिलोने कुछ वेनिस से खरीदे गये थे कांच की आलमारियों में सजे थे . घर में घुसते ही रईसी का अहसास होता था सोने के कमरे में फर्श पर रेशम के कालीन उस पर मोटा गद्दा जिन पर मलकिन सोती थी .घर में कोई पलंग नहीं था हाँ नाजुक नक्काशी दार छोटी – छोटी मेज थी जिन पर सजावटी सामान सजाया गया था. दोनों नौकरानियां दिन भर काम में लगी रहती .

रजिया बी उनसे फ़ारसी मिश्रित उर्दू बोलती थीं वह बच्चियों को बहुत प्यार करती थी उनकी हर शरारत पर हंसती , उनको हर बात पर सलीका सिखाती जोर से मत हंसों बात करने में थोड़ा मुहँ खोलो धीरे बोलो जब बैठो पैर मोड़ कर बैठो ,नफासत से रहो और भी बहुत कुछ .बच्चियों से वह अंग्रेजी में बातें करती थीं उन्होंने सुझाव दिया सभी बच्चों का पासपोर्ट बनवा लें गमी की छुट्टियों में विदेश भ्रमण करने ले जाना चाहिए इससे बच्चों के दिमाग खुलते हैं दोनों परिवारों के लिए विदेश जाना मुश्किल नहीं था छोटे भाईजान व्यापार के सिलसिले में बाहर जाते रहते थे .डाक्टर साहब ,शहनाज उनके भाई भाभी बेहद खुश थे ऐसी पड़ोसन बड़ी तकदीर से मिलती हैं वह दोनों परिवारों के करीब आती गयीं .नाज और हिना के स्कूल में बड़े घरों के बच्चे पढ़ते थे उनकों छोड़ने के लिए स्वयं जाना पड़ता था छुट्टी के समय हर बच्चे को अम्मी या बाबा को सौंपा जाता बच्चों के गले में आई कार्ड लटका रहता जिनमें माँ बाबा की फोटो लगी रहती थी . अपनी पड़ोसन से दोनों घरों का प्रेम इतना बढ़ गया अक्सर एक दूसरे को खाने पर बुलाते बड़ी अम्मी बच्चियों के होम वर्क करवा देती .

डाक्टर साहब के अब्बा जागीरदार थे अपने एरिया के दबंग थे अम्मी की पाँच बरस पहले मृत्यू हो गयी थी .बड़े अब्बा को दिल का दौरा पड़ा उनकी हालत खराब थी अंतिम साँसे ले रहे थे उनके चारो बेटों पोते पोतियों को तुरंत बुलाया गया लेकिन दोनों बच्चियों के सातवीं क्लास के पेपर थे बेटियाँ जहीन थी पेपर देना चाहती थी क्या किया जाये ? नाज की माँ ने जाने के विचार छोड़ दिया क्या करें? बिरादरी में चर्चा होगी या बच्चियों के स्कूल में मेडिकल दे दें . ऐसे में रजिया बी ने सुझाव दिया बेटियाँ मेरे पास छोड़ दें बेटियाँ कभी भी उनके घर सो जाती थीं लेकिन जल्दी लौटने की कोशिश करना आपकी लाड़ली बच्चियां हैं उदास हो गयीं तो मैं कैसे सम्भालूंगी . दोनों परिवारों को सुझाव पसंद आया तुरंत स्कूल में एप्लीकेशन एवं बड़ी अम्मी की तस्वीर दे दी गयी कुछ दिन तक रजिया बीबी बच्चियों को छोड़ने और लेने जायेंगी .

दोनों परिवार गाड़ियों से रात को ही चल दिए सुबह तक पहुंच जायेंगे दस घंटे का सफर था रजिया बीबी ने समझाया बेटियों की फ़िक्र मत करना दोनों टाईम फोन करवाती रहूंगी. मेरी सहेली के भाई भी फौज में थे उनकी शहनाज से रिश्तेदारी थी वह फ्रंट पर थे परन्तु उनका परिवार लाहौर में रहता था ,रजिया बी को समझा दिया था कोई परेशानी हो तो हमारे रिश्तेदारों से सम्पर्क कर लेना . सुबह तक परिवार रावल पिंडी पहुंच गया एक घंटे का आगे रास्ता था . घर में गम का माहौल था अब्बा के बचने की उम्मीद नहीं थी पूरे शरीर में जान नहीं थी केवल आँखें खुली थी अपने बेटों पोते पोतियों को देख कर आँखों में आंसू छलक आये इससे अधिक होश नहीं था दिन भर अपनों के जमघट में घिरे रहे रात को अंतिम सांस ली .सभी रिश्तेदारों को इत्तला दे दी गयी .

शाम को रजिया का फोन आया उन्हें बता दिया बड़े अब्बा नहीं रहे बेटियों से बात की बड़ी अम्मी के साथ खुश थीं पेपर भी अच्छा गया था .दोनों परिवार बेफिक्र हो गये रोज बच्चियों से शाम को बात होती थी .बड़े अब्बा जागीर की देखभाल करते थे कई कारिंदे भी थे अब आगे प्रबंध करना था सब मिला कर दस दिन लग गये . चलने से पहले रजिया बी को सूचरत ना दे दी उन्होंने कहा खाना गर्मा गर्म तैयार मिलेगा . लाहौर पहुंचते –पहुंचते एक बज गया . रजिया बीबी के घर अन्धेरा था केवल बाहर का बल्ब जल रहा था . सोचा सब सो रहे हैं आधीरात को परेशान क्या करना ?बेफिक्र होकर सो गये अजान की आवाज से आँख खुली .हैरानी हुई पड़ोस में कोई हलचल नहीं हैरान परेशान बाहर का फाटक खोल कर बरामदे में पहुचे देखा घर के दरवाजे पर ताला लगा था पड़ोसियों से पूछा उन्होंने बताया कल रजिया बीबी हमसे मिलने आई थीं वह बच्चियों को स्कूल से ला कर आपसे मिलने वह आपके गावँ जायेंगी कह कर गयीं थीं पीछे घर में फोन घुमाया वहाँ कोई नहीं पहुंचा चौकीदार से पूछा उसने बताया रात को ट्रक आया था उसमें सामान लद रहा था परन्तु रजिया बीबी और बच्चियां आपके घर में थीं उनको वह घर की चाबी दे आये थे .

अनहोनी की आशंका से पसीने छूट गये थाने पहुंचे रिपोर्ट लिखवाई वहाँ थानेदार ने बताया इन्हीं दिनों में अच्छे घरों की चार बच्चियां गायब है दोनों परिवारों की हालत खराब हो गयी बच्चियों और रजिया बी को कहां नहीं ढूंढा उनका कुछ अता पता नहीं था रसूखदार ऊँची पहुंचवाला परिवार था पूरे पाकिस्तान की हर चौकी पर बच्चियों एवं रजिया बी की फोटो पहुंचाई इश्तहार दिए हर गावँ गली में रजिया के फोटो सहित पोस्टर चिपकवाये अखबार में पता बताने वाले के लिए मोटा इनाम रखा कोई खबर नहीं .सूफिया ने लंबी सांस ली गायब होने से एक दिन पहले रजिया बीबी हमसे मिलने आई थीं कह रही थी बच्चियों के पेपर अच्छे हो गये इनको लेकर रावलपिंडी मिलने जायेगी बच्चियां साथ में आयीं थी . हमें जरा शक नहीं हुआ . स्कूल में पूछताछ की इंचार्ज ने जबाब दिया पेपर खत्म होने के बाद रजिया मैडम रोज की तरह दोनों बच्चियों को ले गयीं थीं . एक दिन देखा पासपोर्ट के पैकेट से दोनों लड़कियों के पासपोर्ट गायब थे सबके डाक्टर साहब की आलमारी में रखे थे .

दस बरस बीत गये बेटियों के मिलने की आस दोनों परिवारों को थी शहनाज बर्दाश्त नहीं कर सकी एक दिन ऐसी सोई फिर नहीं उठीं डाक्टर साहब भीतर से टूट गये यही हालत छोटे भाई एवं भाभी की थी अब उनके तीनों बेटों का निकाह हो गया वह व्यापार सम्भालने लगे परन्तु भाईजान व्यापार के काम में रूचि न लेकर इबादत करते रहते बेटी की कसक से उनकी आँखे भीगी रहतीं|

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