अक्सर

27 जनवरी 2015   |  संजीव बाल्दा   (204 बार पढ़ा जा चुका है)

अक्सर

अक्सर मुझे वो याद रहता है -2
जो मैं भूल जाना चाहता हूँ !

होठों पर नहीं आते वो नगमें -2
जो मैं गुनगुनाना चाहता हूँ !

बढ जाती हैं दूरियां उससे और भी -2
जब भी मैं फासले घटाना चाहता हूँ !

ख्यालों में होता है चेहरा उसी का -2
जिसकी तस्वीर भी मैं जहन से मिटाना चाहता हूँ !

अक्सर मुझे वो याद रहता है -2
जो मैं भूल जाना चाहता हूँ !





© संजीव बाल्दा



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