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हाँ हमे अब सवरना है

12 जून 2015   |  राजीव रंजन सिंह "राजपूत"

हाँ हमे अब सवरना है

हमे प्यार के लिये सवरना है…


बंद आंखों के ख्वाबो मे उलझना है।


हमे प्यार के लिये सवरना है....


चोट खाकर मुशकुराते है हम


बंद होठो से गुनगुनाते है हम


वो जख्म देकर हमे हसाते है


उनकी यादों से सजा पाते है हम


हमे प्यार के लिये सवरना है......


मख़मली बाहों का हार मिले


कोरे कागज पे लिखा जिंदगी के नाम मिले


करके बंद पल्लकों को उनसे छुपाना है


हमे फिर इक उजाला मिले


कागज पे बने गुलाब की प्याला मिले


आज फुलो के टुकरो से चोट खानी है


हमे प्यार के लिये सवरना है.... हाँ हमे अब सवरना है....






----​ राजीव रंजन सिंह "राजपूत"

8936004660 ​

Email :-rajivranjansingh2020@gmail.com


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