शायरी लिखना कुछ इस कदर मन को भ गया - शिखा

08 जुलाई 2015   |  Shikha   (1018 बार पढ़ा जा चुका है)







शायरी लिखना कुछ इस कदर मन को भ गया ,


रूह की ख़ुशी और दर्द को जैसे पन्नो पर दाल दिया.





अश्क़ की बारिश से कभी क्या कुछ लिख दिया,


तो कभी लबो की हंसी से उन लम्हों को कैद कर दिया.





संजोने लगते है अलफ़ाज़ यु हमारे ज़हन मई,


जैसे पंछी को आसमान मई उड़ना सीखा दिया.





फूल महकने लगते है बगिया मई,


जैसे शाम को परवाने ने गले मिला दिया.





प्यार के नशे को उसने दिल के समुन्दर मई डुबो दिया,


अल्फाज़ो ने खुद बी खूब ज़हन से निकालके कलाम बना दिया .





ना जाने कहा से ये हुनर हम मई आ गया,


रूह को ही जैसे हमने अल्फाज़ो मई उतार दिया.





शिखा

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Shikha
15 जुलाई 2015

Bahot बहोत shukriya manjeetji

मंजीत सिंह
13 जुलाई 2015

लिखना आपको भा गया... हमे पढ़ना ... बढ़िया ... लिखने से हमारे मन की ढेरों बातें निकल जाती है .. और अजीब सी शांति मिलती है

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