ब्रह्माण्ड

10 जुलाई 2015   |  योगिता वार्डे ( खत्री )   (862 बार पढ़ा जा चुका है)

ब्रह्माण्ड

 ब्रह्माण्ड से पहले अंतरिक्ष नहीं, आकाश भी नही था, छिपा था क्या कहाँ,किसने देखा था? अनेको प्रश्न है जिनका कोई  एक निश्चिंत रूप से  उत्तर देने वाला ठोस  सिद्धांत अभी तक सामने नही आया है| पर कहा जाता है की सृष्टि की उत्त्पति आज भी रहस्य है ।


 ब्रह्मांड का आकर अण्डाकार है,ब्रह्माण्ड से पहले कुछ भी नही था| यह कहा जाता है करीब १३ अरब साल पहले ब्रह्मांड आस्तित्व मैं आया|


 पौराणिक कथाये यां मान्यताओं को देखें तो ब्रह्मांड मैं अचानक कोई धमाका हुआ और सृष्टि की रचना हो गई| विज्ञानं मैं भी ब्रह्मांड को लेकर तथ्ये जुड़े हुए हैं आइये उनपर नजर डालते हैं - द्रव्य और ऊर्जा के सम्मलित रूप को ब्रह्माण्ड कहते हैं| १९२९  में एडवीन हब्बल ने एक आश्चर्य जनक खोज की, उन्होने पाया की अंतरिक्ष में आप किसी भी दिशा में देखे आकाशगंगाये और अन्य आकाशीय पिंड तेजी से एक दूसरे से दूर हो रहे है। दूसरे शब्दों मे ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। इसका मतलब यह है कि इतिहास में ब्रह्मांड के सभी पदार्थ आज की तुलना में एक दूसरे से और भी पास रहे होंगे। और एक समय ऐसा रहा होगा जब सभी आकाशीय पिंड एक ही स्थान पर रहे होंगे | तब से लेकर अब तक खगोल शास्त्रियों ने उन परिस्थितियों का विश्लेषण करने का प्रयास किया है कि कैसे ब्रह्मांडीय पदार्थ एक दूसरे से एकदम पास होने की स्थिती से एकदम दूर होते जा रहे है।

 

 इतिहास में किसी समय , शायद १०  से १५अरब साल पूर्व , ब्रह्मांड के सभी कण एक दूसरे से एकदम पास पास थे। वे इतने पास पास थे कि वे सभी एक ही जगह थे, एक ही बिंदु पर। सारा ब्रह्मांड एक बिन्दु की शक्ल में था। यह बिन्दु अत्यधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दु(infinitesimally small ) था। ब्रह्मांड का यह बिन्दु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म(infinitely hot) रहा होगा। इस स्थिती में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिती है जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिती में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल और समय के कोई मायने नहीं रहते है।* इस स्थिती में किसी अज्ञात कारण से अचानक ब्रह्मांड का विस्तार होना शुरू हुआ। एक महा विस्फोट के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और ब्रह्मांड में पदार्थ ने एक दूसरे से दूर जाना शुरू कर दिया। यह प्रक्रिया अनादि काल से चल रही है, हमारा विश्व इस विस्तार और संकुचन की प्रक्रिया में बने अनेकों विश्व में से एक है। इसके पहले भी अनेकों विश्व बने है और भविष्य में भी बनते रहेंगे।


 ब्रह्मांड के संकुचित होकर एक बिन्दु में बन जाने की प्रक्रिया को महा संकुचन(The Big Crunch) के नाम से जाना जाता है। हमारा विश्व भी एक ऐसे ही महा संकुचन में नष्ट हो जायेगा, जो एक महा विस्फोट के द्वारा नये ब्रह्मांड को जन्म देगा। यदि यह सिद्धांत सही है तब यह संकुचन की प्रक्रिया आज से १  खरब ५०  अरब वर्ष पश्चात प्रारंभ होगी।

              -योगिता वार्डे (खत्री ) ( सम्पूर्ण जानकारी गूगल के सौजन्य से )

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धन्यवाद अवधेश जी !

सच में आपकी कलम में रवानी है ,चिंतन भी तथ्यात्मक हैं ,वाक्य संरचना बहुत सुन्दर ,बधाई हो योगिता जी ज्ञानवर्धक आलेख के लिए !

ध्न्यवाद मंजू जी !

मंजू
09 अक्तूबर 2015

योगिताजी बहोत उपयोगी रचना है आपकी ,और ज्ञानवर्धक भी ।.

धन्यवाद राघवेन्द्र जी

ज्ञानप्रद लेख...

धन्यवाद मंजीत जी

मंजीत सिंह
11 जुलाई 2015

अब के आर्टिकल्स में मुझे आपका ये आर्टिकल सबसे ज्यादा अच्छा लगा ... पढ़ने में बहुत रोचक और ज्ञान पूर्ण ... इस बारे में मुझे थोड़ा कम पता था ...लेकिन आपने बहुत ही अच्छे से लिखा है और काफी अलग लिखा है ... बढ़िया लगा ...

धन्यवाद ओम प्रकाश जी

बहुत बहुत धन्यवाद शब्दनगरी मैं आपसे सहमत हूँ, हम सभी को अच्छी रचनाओं पर एक दूसरे का उत्त्साह बडाना आवयशक है|

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