स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

12 अगस्त 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (3272 बार पढ़ा जा चुका है)

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियाँ


आजादी के बाद जहाँ भारत ने समाज के हर क्षेत्र में तेजी से विकास किया वहीं विज्ञान के क्षेत्र में भी अनेक उपलब्धियाँ हासिल कीं। स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार में विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों का एक पृथक मंत्रालय बनाया गया। यह मंत्रालय भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने अधीन रखा था। नेहरू जी भारत के बहुमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए सब तरह के साधन और सुविधाएं जुटाईं।
उपलब्ध क्षमता और प्रोत्साहन का श्रेय है कि इन वर्षों में भारत ने विश्व की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी की महानतम शक्तियों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। परिणामस्वरूप भारत कच्चे माल के निर्यात से अब विश्व की सर्वाधिक मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था में से एक बन गया है।
भारत ने विज्ञान के अन्य विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। खगोल विज्ञान में प्राचीन अध्ययनों के आधार पर ही भारत के वैज्ञानिक अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यों में लगे हैं। आज भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिक अपने बल पर उपग्रह बनाकर और अपने ही शक्तिशाली राकेटों से उन्हें अंतरिक्ष में स्थापित करने में समर्थ हैं। अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत काफ़ी आगे पहुँच चुका है। इसके साथ ही भारत के दूर संवेदी नेटवर्क में 634 ग्रह शामिल हो गए हैं। हमारा यह दूर संवेदी नेटवर्क संसार का सबसे बड़ा दूरसंवेदी नेटवर्क है। अंतरिक्ष कार्यक्रमों का विकास संचार माध्यमों तथा रक्षा मामले सम्बन्धी सफलताओं में काफ़ी सहायक सिद्ध हुआ है। आज भारत विभिन्न दूरियों तक मार करने वाले प्रक्षेपास्त्र बनाने में समर्थ है। देश को प्रतिरक्षा के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय सफलताएँ मिली हैं।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी आश्चर्यजनक प्रगति की है। परमाणु ऊर्जा का मुख्यतः उपयोग कृषि और चिकित्सा जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए किया जा रहा है। परमाणु और अंतरिक्ष से जुड़ा विषय इलैक्ट्रॉनिक्स है। भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति की है। परम 10000 सुपर कंप्यूटर बनाकर हम इस क्षेत्र में अग्रणी देशों की पंक्ति में आ गए हैं। हम अब सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित उपकरणों का निर्यात विकसित देशों को भी कर रहे हैं। भारत के सूचना प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित इंजीनियरों की अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों में भारी माँग है।
वैज्ञानिक अनुसंधानों के बल पर भारत ने जलयान निर्माण, रेलवे उपकरण, मोटर उद्योग, कपड़ा उद्योग आदि में आशातीत सफलता प्राप्त की है। आज हम भारत की उद्योगशालाओं में बनी अनेक वस्तुओं का निर्यात करते हैं।

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