जब कभी भी लौट कर इन राहों से गुज़रेंगे हम जीत के सब गीत कई-कई बार हम फिर गायेंगे खोज कैसे पायेंगे मिट्टी तुम्‍हारी साथियो ज़र्रे-ज़र्रे को तुम्‍हारी ही समाधि पायेंगे

14 अगस्त 2015   |  आशीष श्रीवास्‍तव   (259 बार पढ़ा जा चुका है)

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धन्यवाद mitron

सच में , खो ही गए तुम हवा बन के वतन की हर सांस में ........
खाव्बों के साथ तेरे चलता रहेगा ....ये कारवाँ .......
देशभक्त वीरों को नमन …… जय हिन्द

भावपूर्ण प्रस्तुति !

मित्रों १० मिनट दे कर इस को सुनियेगा

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