अब सरकारी स्कूलों के दिन बहुरेंगे

19 अगस्त 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (300 बार पढ़ा जा चुका है)

अब सरकारी स्कूलों के दिन बहुरेंगे

सरकारी स्कूलों के दिन फिर से बहुरेंगे इसकी हक़ीक़त से हम आगामी शैक्षणिक सत्र से रूबरू होंगे जब माननीयों और उनके मातहत नौकरशाहों के बच्चे सरकारी स्कूलों में बिना भेद-भाव के शिक्षा प्राप्त करेंगे I यदि सरकारी स्कूलों में माननीयों व नौकरशाहों के बच्चे नहीं पढ़ते हैं तो माननीयों के मानदेय और नौकरशाहों के वेतन से पढ़ रहे बच्चों के शिक्षण-शुल्क के बराबर की रक़म कटौती हो जाएगी I उच्च न्यायालय के इस फरमान से सरकारी महकमों में हलचल मच गयी है इसके साथ ही नेताओं की पेशानी पर भी बल पड़ते नज़र आ रहे हैं कि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में कैसे पढेंगे I
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने यह आदेश याची शिव कुमार पाठक व अन्य के मामले में सुनवाई के दौरान सुनाया I याची द्वारा सरकारी स्कूलों में सहायक अध्यापक व विषय अध्यापक की चयन प्रक्रिया और पदोन्नति का मामला अदालत में प्रस्तुत किया गया था I याचिका की सुनवाई में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने सरकारी खजाने से वेतन व मानदेय प्राप्त करने वाले सभी नेताओं व अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अनिवार्यता करने का आदेश सुनाया है I आदेश के मुताबिक जिनके बच्चे कान्वेंट या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई करते हैं तो वहां भी जाने वाली फीस के बराबर की रक़म उनके वेतन से कटौती कर शिक्षा विभाग की निधि में जमा करानी होगी I इसके साथ ही अवधि विशेष के लिए उनकी वेतन-वृद्धि व पदोन्नति भी प्रभावित होगी I यह आदेश आगामी शैक्षणिक सत्र में अमली जामा लेगा तभी आदेश के लागू होने की हक़ीक़त देखने को मिलेगी I फ़िलहाल उच्च न्यायालय के इस आदेश से सरकारी महकमों मे काम कर रहे मुलाजिमों के बीच यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है कि अगले साल बच्चों को कैसे पढ़ाया जाए I

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उषा यादव
19 अगस्त 2015

मैं समझती हूँ कि बहुत पहले यह नियम लागू हो जाना चाहिए था I देर आए, दुरुस्त आए...सुन्दर एवं सार्थक लेख हेतु धन्यवाद !

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