--राखी का सन्देश भाई के नाम---

28 अगस्त 2015   |  पुष्पा पी. परजिया   (1378 बार पढ़ा जा चुका है)

--राखी का  सन्देश  भाई के नाम---

यादों के झरोगे आये नजर के सामने

बचपन दर्पण बन सामने आये नजर के सामने

रंगबिरंगे धागों से बनी राखी मन ललचाये नजर के सामने

सावन की बूंदों संग अंखियाँ आंसुआ बहाए भैया की फोटो के सामने

ख़ुशी है ग़म भी है कई भावनाएं भी है नजर के सामने

पर हम खुद को बहलायें जाये सबके सामने ..

बरसतीं आशीष है निकलती दुवायें हैं जब राखी आती है नजर के सामने

यादों की बिजली कौंध जाती एक तस्वीर बना जाती और मन को है तडपाती
कहती है भैया रखना बहना को हरदम नजर के सामने

दूर देश बैठी भैया की लाडो कहे, भाई रहियो सदा नजर के सामने...

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इस रचना को पसंद करने के लिए हार्दिक आभार सह धन्यवाद राजेंद्र जी ....

राजेन्द्र मल्ल
30 सितम्बर 2015

खूबसूरती के साथ आपने पिरोया है इस रचना को .

इस रचना को पसंद करने हेतु अनेकानेक धन्यवाद ओम प्रकाश शर्मा जी .

बहुत सुन्दर रचना !

हार्दिक आभार रजत जी ,इस कविता को पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

Rajat Vynar
04 सितम्बर 2015

बेहतरीन कविता

वर्तिका जी कविता को पसंद करने के लिए और सुन्दर शब्दों से नवाजने के लिए हार्दिक आभार के साथ बहुत बहुत धन्यवाद

वर्तिका
31 अगस्त 2015

रक्षा-बंधन के भावों को बहुत सुंदरता से अपनी कविता के माध्यम से दर्शाया हैं| बधाई!

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