मुट्ठी बांधकर

31 अगस्त 2015   |  अर्चना गंगवार   (411 बार पढ़ा जा चुका है)

जो मुट्ठी बांध के
एक उंगली के इशारे से
हमको चाँद दिखाते है
हम उनकी मुडी चार
उंगलियों में झांकते है
की
वो क्या है जिसके लिए
वो हमें बहलाते है .......

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dineshkumar
27 अक्तूबर 2017

wah

शुक्रिया ओम प्रकाश जी दो कदम रचना के साथ चलने के लिए

अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

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