गुफ़्तगू

01 सितम्बर 2015   |  अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'   (202 बार पढ़ा जा चुका है)

गुफ़्तगू

बे-बजह जिक्र ,तुम गुफ्तगू मत करो ,
जो मिले सो मिले ,आरज़ू मत करो ।

रहने दो इल्म को,अपने ईमान पर ,
इक हुनर है तो सौ आरज़ू मत करो ।

वो जो अफ़साने ,अंजाम ना पा सकें,
कितना बेहतर हो,उनको शुरू मत करो \

गर सलामत रहे ,आपका ज़र्फ़ यूं ,
तो रखो शौक से, रूबरू मत करो ।

काबिले गुफ्तगू उनको रहने भी दो ,
इस क़दर भी तो ,बे-आबरू मत करो ।

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