एक साया सा कहीं !

03 सितम्बर 2015   |  अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'   (196 बार पढ़ा जा चुका है)

एक साया सा कहीं !

वो ही बुत बनके मेरे सामने आ बैठा है,
बनके खुशबू ,जो हवाओं में घुला रहता है ।

नूर बनके जो ,निगाहों में आ समाया है ,
ज़िन्दगी बनके कलेजे में, धड़क उठता है ।

खैर छोडो! ये फ़साना है रुहे बिस्मिल का ,
दर्द-ए=जज्वात ज़माना कहाँ समझाता है|

लोग मौजों से उलझते हैं, लुत्फ़ आने तक ,
तूफां किश्ती को कनारे पे ,डुबा देता है ।

मुस्तिकिल कौन रहा है ,जहाँ में यारों ,
पैदा होता है ,वो इक रोज़ फ़ना होता है ।

उनकी किस्मत भी है इक रात की दुल्हन जैसी,
पांव होते हैं ज़मीं,और कहीं अपना सफ़र होता है ।

हमको हर शख्स ,अब खानाबदोश लगता है,
पास मेरे भी नहीं ,अपना पता होता है ।


अगला लेख: समय



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 सितम्बर 2015
सत्य का आकार तुम हो ,सत्य का आधार तुम हो,सृष्टि की संवेदना में ,शक्ति का संचार तुम हो ।दृष्टी से झरती तुम्हारी ,सूर्य की नव रश्मीयाँ ,तुम प्रकाशित तुमही प्रगति,उपहार तुम हो ।आत्मा में धर्म ,मन ,वाणी ,ह्रदय में संहित ,प्रेम की आराधना ,समृद्धि का उद्दगार तुम हो|सत्य है अक्षय ,प्रगट होकर ,ना क्षय होता
05 सितम्बर 2015
05 सितम्बर 2015
होगा हृदय मंथन ,मगर विश्वास चाहिए,ज्यों अंधकार के लिए,प्रकाश चाहिए ।संभव है नई सृष्टि का,निर्माण तो मगर ,कल्पनाओं को खुला, आकाश चाहिए ।दृष्टि-दृष्टि के विभिन्न ,दृष्टिकोण हैं ,दृश्य को अदृश्य का ,एहसास चाहिए । संवेदना करेगी,सूक्ष्मता से निरिक्षण ,प्रस्तुत तो आदि -अंत का इतिहास चाहिए ।ये दौर मरुस्थल
05 सितम्बर 2015
12 सितम्बर 2015
समय वो तलवार है जिसे कोई नहीं हासिल कर सका, समय वो ताकत है जिसे कोई नही रोक सका, समय से आजतक कोई नही बच सका लगता है , लगता है हम समय को काट रहे हैं ,पर सच तो है की समय हमे काट रहा है,समय वो ज़ंजीर है जिसे कोई नही तोड़ सका, समय वो चीज है जिसे भागवान नही रोक सका ।'कृष्णा' ! ये पंक्तींया मेरे
12 सितम्बर 2015
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x