समय

12 सितम्बर 2015   |  अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'   (143 बार पढ़ा जा चुका है)

समय वो तलवार है जिसे कोई नहीं हासिल कर सका,
समय वो ताकत है जिसे कोई नही रोक सका,
समय से आजतक कोई नही बच सका लगता है ,
लगता है हम समय को काट रहे हैं ,
पर सच तो है की समय हमे काट रहा है,
समय वो ज़ंजीर है जिसे कोई नही तोड़ सका,
समय वो चीज है जिसे भागवान नही रोक सका ।

'कृष्णा' ! ये पंक्तींया मेरे ९ बर्षीय पुत्र की स्व-अभिव्यक्ति है !

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