मातृभाषा हिन्दी

15 सितम्बर 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (171 बार पढ़ा जा चुका है)

मातृभाषा हिन्दी

अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।
ज्यों घन घुमड़े, करे दामिनी घटा मध्य अठखेली ।।
आज परिष्कृत शुभ्र सुन्दरी, हो गई हिन्दी भाषा ।
कवि, लेखकों, विद्वानों की मिटती ज्ञान पिपासा ।।
विकसित हुई आज ये हिन्दी, सब बाधाएँ झेलीं ।
अनुपमेय लगती जैसे, अभिसारिका नई नवेली ।।
अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।
ज्यों घन घुमड़े, करे दामिनी घटा मध्य अठखेली ।।
-डॉ. राम किशोर 'ज़मीर'
पूर्व प्राचार्य (हरदी)
अजयगढ़ जिला पन्ना (म.प्र.)

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