चिराग़

15 सितम्बर 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (147 बार पढ़ा जा चुका है)

चिराग़

तेरी रहमत से जी रहे हैं
परिधि में रहकर
चिरागों से ज़रा पूछ
अपनी मर्ज़ी से
न वे जलते हैं
और न बुझते हैं ।
उनकी जलती हुई
लौ को देखो
अपने पास न
वे कुछ रखते हैं ।
लाल अग्नि में जलकर
ख़ामोश हो जाते हैं
रौशनी किसको मिली
वे नहीं पूछते
अंधेरों में कौन खो गए
वे नहीं जानते
उनकी फितरत थी जलना
वे जलते रहे,
उनका काम था राह दिखाना
वे दिखाते रहे...

-जय वर्मा
jaiverma777@yahoo.co.uk

अगला लेख: आज का शब्द (१२)



अलिप्त मन को चिरागों की संज्ञा देकर बहुत ही अच्छा वर्णन ।. बहुत बहुत बधाइयाँ

अर्चना गंगवार
15 सितम्बर 2015

उनकी फितरत थी जलना
वे जलते रहे,
उनका काम था राह दिखाना
वे दिखाते रहे...

हम इंसान ऐसे कहा सोचते ।......सत्य कहा

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 सितम्बर 2015
शब्दनगरी वेबसाइट तथा मोबाइल एप पर, आप असंख्य लोगों को अपने साथ जोड़ सकते हैं| सिर्फ़ एक क्लिक में, उन तक अपनी रचनायें एवं संदेश पहुँचा सकते हैं, मित्र तथा अनुयायी बना सकते हैं और आयाम के अनेक सदस्यों से जुड़ सकते हैं| इस मंच के माध्यम से, आप विभिन्न लोगों से जुड़कर उन तक अपनी विचारों को लेखों के माध्य
05 सितम्बर 2015
22 सितम्बर 2015
निरूपण :1- कोई विचार किसी के सम्मुख प्रस्तुत करने की क्रिया या भाव 2- निर्वचन प्रयोग : भाषा बुद्धि का एक उपकरण है । सम्यक निरूपण या वर्णन का माध्यम है ।
22 सितम्बर 2015
10 सितम्बर 2015
विलक्षण: 1- अद्भुत 2- विस्मयकारी 3- अनूठा 4- अजीब 5- अलबेला प्रयोग: हमारा राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और भाषाओं के क्षेत्र में एक विलक्षण वैविध्य प्रदर्शित करता है।
10 सितम्बर 2015
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x