हिंदी फिल्मों के प्रख्यात गीतकार श्री प्रसून जोशी जी द्वारा एक प्रतियोगिता में चंद्रेश विमला त्रिपाठी का चयनित गीत, कानपुर शहर के ऊपर...

21 सितम्बर 2015   |  चंद्रेश विमला त्रिपाठी   (336 बार पढ़ा जा चुका है)

स्टाइल की हो बात, या हो ट्रैफिक का जाम,
मस्ती में डूबा दिन, जहां रंगीन सारी शाम,
कंटॉप-लल्लनटॉप, फाडू-जुगाडू काम,
. . . सबसे अलग है भईया, अपने कानपुर का नाम . . .

आई. आई. टी., ग्रीनपार्क, रेव-थ्री का रॉक,
मेट्रोसिटी में लहियापट्टी स्नैक्स का शॉक,
बीसीबाज़ी ऐसी, हर जुबान हो जाये लॉक,
कनपुरिया कल्चर का अपनापन है, सबकी टॉक,
काकादेव की कोचिंग हो, बर्रा-नौबस्ता की बात,
जेन्ट्री आर्य-स्वरूपनगर की, कर दे सबको मात,
हर दिल में बसता यहाँ अल्लाह हो या राम,
. . . सबसे अलग है भईया, अपने कानपुर का नाम . . .

जे. के. टेम्पल-पनकी-परमट, गंगा बैराज का प्रिफ़रेंस,
जाजमऊ-नानाराव-बिठूर में, हिस्ट्री का रिफरेन्स,
लेदर गुड्स-डिफेन्स आइटम्स, बिज़नेस बाज़ार का सेंस,
हजारों प्राब्लम्स हर सिटी सी हैं, पर नहीं है कोई टेंस,
चमनगंज की रौनक हो, कैंट-घंटाघर की बात,
जेन्ट्री साकेत-गोविन्दनगर की, कर दे सबको मात,
हर दिन इसकी बातें सुनके, दुनिया ले दिल थाम,
. . . सबसे अलग है भईया, अपने कानपुर का नाम . . .

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अर्चना गंगवार
21 सितम्बर 2015

वाह ......बहुत खूब
कानपुर धूल धुँआ और धुल बसी है
फिर भी हर पल अपनी मस्ती है
दुखियारे को काम मिलेगा
नून रोटी हर शाम मिलेगा
हर मोहरे पर जाम मिलेगा
इसकी अपनी हस्ती है
तभी हर चेहरे पर मस्ती है

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