आज का शब्द

22 सितम्बर 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (312 बार पढ़ा जा चुका है)

आज का शब्द

निरूपण :
1- कोई विचार किसी के सम्मुख प्रस्तुत करने की क्रिया या भाव
2- निर्वचन

प्रयोग : भाषा बुद्धि का एक उपकरण है । सम्यक निरूपण या वर्णन का माध्यम है ।

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प्रेम करने के लिए गढ़ने को अपने ही वायदे और पैमाने ताकि बिना किसी के सपनों को लांघे अपने सपनों को सजाने की जगह मिल जाए । -डॉ. वीणा सिन्हा (एम्.डी.)ई-१०४/५, शिवाजी नगर, भोपाल ।
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अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।ज्यों घन घुमड़े, करे दामिनी घटा मध्य अठखेली ।।आज परिष्कृत शुभ्र सुन्दरी, हो गई हिन्दी भाषा ।कवि, लेखकों, विद्वानों की मिटती ज्ञान पिपासा ।।विकसित हुई आज ये हिन्दी, सब बाधाएँ झेलीं ।अनुपमेय लगती जैसे, अभिसारिका नई नवेली ।।अब भाषा भारत की हिंदी, ऐसी है अलबेली ।ज्यो
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तेरी रहमत से जी रहे हैं परिधि में रहकर चिरागों से ज़रा पूछ अपनी मर्ज़ी से न वे जलते हैं और न बुझते हैं ।उनकी जलती हुई लौ को देखो अपने पास न वे कुछ रखते हैं ।लाल अग्नि में जलकर ख़ामोश हो जाते हैंरौशनी किसको मिली वे नहीं पूछते अंधेरों में कौन खो गए वे नहीं जानते उनकी फितरत थी जलना वे जलते रहे, उनका काम थ
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