" ज़िन्दगी "

10 अक्तूबर 2015   |  रणबीर सिंह कुशवाह   (127 बार पढ़ा जा चुका है)

" ज़िन्दगी "

हर बात कुछ याद दिलाती है 

हर याद कुछ मुस्कान लाती है 

कौन नहीं चाहता खुशियों को,

पास रखना अपने 

पर कहाँ वो हर पल 

साथ रह पाती है 

समय का आभाव भी 

बहुत है ज़िन्दगी में 

भूल गए अच्छे पलों को 

पैसे की बंदगी में 

पर साथ तो अतीत 

का भी चाहिए 

बहुत ही कम समय 

और शब्द कम है, ज़िन्दगी में !!!


अगला लेख: " चाँद "



माज़ी-हाल-मुस्तकबिल और पैसा भी है लेकिन खुशियों को बांटने के लिए वक़्त वाक़ई बहुत कम है ....बहुत ही सुन्दर सन्देश प्रेषित करती कविता !

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