पक्षी और हम

29 अक्तूबर 2015   |  अर्चना गंगवार   (459 बार पढ़ा जा चुका है)

नयन से नयन न मिले

पर अश्क साथ बह चले

जो देखा मृत पक्षी को

सारे  पक्षी उमड़ पड़े

क्योकि वो पक्षी है ..........


और हम......


नयन से नयन बहुत मिले

पर अश्क साथ न बह चले

जो देखा मृत व्यक्ति को

कितने  हाथ उमड़ पड़े

(सारे पैसे निकल गए)

क्योकि हम व्यक्ति है ........

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अवधेश जी ।.बहुत बहुत धन्यवाद

अर्चना जी बहुत ही सुन्दर रचना बधाई !

योगिता जी रचना को आपका वक़्त और प्यार मिला बहुत बहुत धन्यवाद

अंगद जी बहुत बहुत dhanyawad

सुन्दर रचना !

बहुत ही अच्छी कविता है

अर्चना गंगवार
31 अक्तूबर 2015

चंद्रेश जी ।........ बहुत बहुत धन्यवाद ।….शब्द्नगरी को ढेर सारी शुभकामनाये ।…।...रचना का जन्म सार्थक हो जाता है ।…।जब उसका मर्म किसी के ज़हन में जगह बना ले .

इस सुन्दर रचना के लिए शब्दनगरी आपको धन्यवाद देता है |

अर्चना गंगवार
30 अक्तूबर 2015

बहुत धन्यवाद ओम प्रकाश जी

अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

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25 अक्तूबर 2015
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