चुनाव

07 दिसम्बर 2015   |  हिमानी यादव   (181 बार पढ़ा जा चुका है)

मैंने कहा साथ रहो , पर तुम ने तन्हाई चुनी ...

 मैंने कहा अपनी किस्मत हम खुद बनाएगे , पर तुमने खुदाई चुनी...

 मैंने कहा शर्म तो संस्कार की नीव है , पर तुमने बेहयाई चुनी ...

 मैंने कहा वादा निभाओ , पर तुमने बेबफाई चुनी...

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रणंजय सिंह
04 फरवरी 2016

अतिसुन्दर

हिमानी यादव
10 दिसम्बर 2015

ये तो यथार्थ है...
मेने तो बस उसे कहा है .

"मैंने कहा शर्म तो संस्कार की नीव है , पर तुमने बेहयाई चुनी" ...बहुत खूब !

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