shabd-logo

कुछ नया सा कहीं हुआ तो है

29 जनवरी 2015

244 बार देखा गया 244
कुछ नया सा कहीं हुआ तो है सिलसिला मोहब्बत का फिर चला तो है I कोई खिड़की खुली हुई थी कहीं चाँद हल्का सा फिर दिखा तो है I कुछ उजाले दिलों में बाकी थे कोई साया अभी हिला तो है I बहारें लौट आयीं हैं दोबारा फूल फिर बाग में खिला तो है I

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए