आसमान

21 दिसम्बर 2015   |  aradhana   (181 बार पढ़ा जा चुका है)

आसमान तेरी किस्मत का कोना ना रहा

बहारों इस जहाँ में नज़ारा ना रहा


रोक लेते गर रुक जाता तेरा काफिला

गिर कर आफ़ताब भी सितारा ना रहा


बीती बातों के लिए बिता दी ज़िन्दगी

बहते साहिल का कोई किनारा ना रहा


कतरा- कतरा जोड़ कर जीते रहे हम भी

इस जहान में कोई अब हमारा ना रहा


कब तक सितम ढाती रहेगी बिज़लियाँ

इस आसमान में कोई सितारा ना रहा


जाती बहार क्या दे गई उससे ज़रा पूछों

"अरु" इन मरहलों में तेरा इशारा ना रहा

आराधना राय "अरु "

अगला लेख: जाती बहार में



बीती बातों के लिए बिता दी ज़िन्दगी
बहते साहिल का कोई किनारा ना रहा

नेहा
22 दिसम्बर 2015

आसमान तेरी किस्मत का कोना ना रहा
बहारों इस जहाँ में नज़ारा ना रहा...बहुत खूबसूरत

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x