कुर्सी महिमा

29 जनवरी 2015   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (130 बार पढ़ा जा चुका है)

सत्ता यानी कुर्सी के बिना एक राजनेता की दशा का चित्रण करता गीत -
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तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों अकल बिन इन्सान जिया |ज्यों आदर बिन मेहमान जिया ||
ज्यों हिन्दी बिन हिन्दुस्तान जिया |ज्यों भक्त बिना भगवान् जिया ||
और साली बिन,और साली बिन, ज्यों सुसराल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों जेब बिना कोई दाम जिया |ज्यों दफ्तर बिन कोई काम जिया ||
ज्यों काम बिना कोई दाम जिया |ज्यों खास बिना कोई आम जिया ||
सिक्कों के बिन,सिक्कों के बिन , ज्यों टकसाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों होली ,बिन रंग जिया |ज्यों नशे के बिन भंग जिया ||
ज्यों केश के बिन बैंक जिया ,ज्यों बिन तरल के टैंक जिया ||
नेता बिन ,नेता बिन ,ज्यों हड़ताल
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों ताली के बिन कव्वाली का |ज्यों गोली के बिन दुनाली का ||
ज्यों जीजे के बिन साली का |ज्यों झगड़े के बिन गाली का ||
बिन नमक के ,बिन नमक के ,ज्यों दाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
खादिम बिन जैसे अल्ला है |नगदी बिन जैसे गल्ला है ||
पारखी के बिन कला है |झगड़ें के बिन जैसे हल्ला है ||
बिन पतों के ,बिन पतों के , ज्यों डाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
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