परिस्थति का प्रभाब

29 जनवरी 2015   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (137 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@ परिस्थिति का प्रभाव @@@@@@
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परिस्थिति किसी काम को ,कितना बदल देती है |
एक जगह जो समस्या होती ,हल दूजी जगह कर देती है ||
जाती -रंजिश से की गयी हत्या,सजा का कारण बनती है |
पर सीमा पर दुश्मन की हत्या,सम्मान की वजह बनती है ||
जो काम निज पत्नी के संग ,पति-धर्म माना जाता है |
वही काम, पर नारी के संग,पाप-कर्म कहलाता है ||
ताक-झांक दूजों के घर की ,कदाचार कहलाती है |
पर जासूसी दुश्मन देश की ,देशभक्ति मानी जाती है ||
झूठ बोलना अपने खातिर , दुर्गुण-पाप कहलाता है |
पर वकालत के पेशे में झूठ,शोहरत खूब दिलाता है ||
प्यार में देने पर गाली ,प्यार और बढाती है |
पर झगड़े में देने पर गाली ,नफरत और भडकाती है ||
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