नीति की बातें

31 जनवरी 2015   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (242 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@@@@ नीति की बातें @@@@@@@@@
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सत्य,सेहत और सिध्दान्तों से ,समझौता नहीं करना चाहिए |
जितना हो सके हम को ,दुख दूजों के हरना चाहिए ||
देश हित के लिए सदा ,काम हमें करना चाहिए |
सही पथ पर चलते हुए ,हमें नहीं डरना चाहिए ||
सन्तुलित और सात्विक भोजन ,हमें सदा करना चाहिए |
पर ठूंस -ठूंस कर पेट कभी ,नहीं हमें भरना चाहिए ||
प्रतिभाशाली व्यक्तियों से ,द्वेष नहीं करना चाहिए |
दिल से दाद देकर उनको ,जोश नया भरना चाहिए ||
सत्य, सार्थक वाणी बोलें ,पर नहीं कभी बकना चाहिए |
जी भर देखे सुन्दरता को ,पर नहीं कभी तकना चाहिए ||
अपने घर के भेदों को ,हमें सदा ढकना चाहिए |
अनुभवों की मंद आँच पर ,ज्ञान हमारा पकना चाहिए ||
जल्दी सोयें रात को ,और सुबह जल्दी जगना चाहिए |
किसी भ्रम को पाल कर ,नहीं खुद को ठगना चाहिए ||
न्याय करो ती ऐसे करो ,कि न्याय हुआ लगना चाहिए |
अपनी जिम्मेदारियों से ,नहीं हमें भगना चाहिए ||
परहेज रख कर जीवन में ,रोगों से हमें बचना चाहिए |
दुबारा भोजन करने से पहले ,खाया भोजन पचना चाहिए ||
जश्न मनाएं त्योहारों पर , पर नहीं शोर मचना चाहिए |
करके अनूठा काम जगत में ,इतिहास नया रचना चाहिए ||
दूजों के दुःख को देख कर ,नीर नैनों से बहना चाहिए |
जीवन में आये संकटों को, धार धीरज सहना चाहिए ||
कर्ज लिया हो अगर किसी से ,तो बिन माँगे भरना चाहिए |
अगर सही है दुर्गेश की बातें ,तो याद उसे करना चाहिए ||
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