आराध्य

31 जनवरी 2015   |  सुशील चन्द्र तिवारी   (483 बार पढ़ा जा चुका है)

आदि से जो अंत तक ,लिखता तुम्हारा भाग्य होगा,


वो ही तो आराध्य होगा ।





साधना जिसकी निरन्तर ,


वंदना जिसकी युगाँतर ,


भाल जिसकी भक्ति में ,करने नमन के बाध्य होगा ,


वो ही तो आराध्य होगा ।





मिला दृढ़ व्यक्तित्व जिससे,


कर्मनिषठ कृतित्व जिससे,


जो तुम्हारे कर्मपथ की,प्रेरणा का साध्य होगा ,


वो ही तो आराध्य होगा ।








विषयहीन सुयतन कैसा,


दिशाहीन प्रयत्न कैसा,


लक्ष्य का संँधान प्रेरक ,मनुज जो सम्भावय होगा,


वो ही तो आराध्य होगा ।।







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