सत्ताहीन राजनेता का हाल

31 जनवरी 2015   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (207 बार पढ़ा जा चुका है)

सत्ता यानी कुर्सी के बिना एक राजनेता की दशा का चित्रण करता गीत -
************************************************************************
तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों अकल बिन इन्सान जिया |ज्यों आदर बिन मेहमान जिया ||
ज्यों हिन्दी बिन हिन्दुस्तान जिया |ज्यों भक्त बिना भगवान् जिया ||
और साली बिन,और साली बिन, ज्यों सुसराल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों जेब बिना कोई दाम जिया |ज्यों दफ्तर बिन कोई काम जिया ||
ज्यों काम बिना कोई दाम जिया |ज्यों खास बिना कोई आम जिया ||
सिक्कों के बिन,सिक्कों के बिन , ज्यों टकसाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों होली ,बिन रंग जिया |ज्यों नशे के बिन भंग जिया ||
ज्यों केश के बिन बैंक जिया ,ज्यों बिन तरल के टैंक जिया ||
नेता बिन ,नेता बिन ,ज्यों हड़ताल
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
ज्यों ताली के बिन कव्वाली का |ज्यों गोली के बिन दुनाली का ||
ज्यों जीजे के बिन साली का |ज्यों झगड़े के बिन गाली का ||
बिन नमक के ,बिन नमक के ,ज्यों दाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
खादिम बिन जैसे अल्ला है |नगदी बिन जैसे गल्ला है ||
पारखी के बिन कला है |झगड़ें के बिन जैसे हल्ला है ||
बिन पतों के ,बिन पतों के , ज्यों डाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल |
कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ |
******************************************************

अगला लेख: उन्नति की ठाना कर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 जनवरी 2015
हि
क्रान्ति-कविता --"हिन्द ने तुम्हे पुकारा है" ********************************************************* भारत की पावन धरती पर ,हर गरीब शरीफ बेचारा है | क्रान्ति का बिगुल बजा तू ,कि हिन्द ने तुम्हे पुकारा है || महँगाई की सुरसा ने , अपना रूप विकराल किया | भ्रष्टाचार के भस्मासुर ने ,जन -जन को बेहाल किया
29 जनवरी 2015
29 जनवरी 2015
@@@@@@ परिस्थिति का प्रभाव @@@@@@ *********************************************************** परिस्थिति किसी काम को ,कितना बदल देती है | एक जगह जो समस्या होती ,हल दूजी जगह कर देती है || जाती -रंजिश से की गयी हत्या,सजा का कारण बनती है | पर सीमा पर दुश्मन की हत्या,सम्मान की वजह बनती है || जो काम निज प
29 जनवरी 2015
31 जनवरी 2015
नी
@@@@@@@@@ नीति की बातें @@@@@@@@@ ***************************************************************** सत्य,सेहत और सिध्दान्तों से ,समझौता नहीं करना चाहिए | जितना हो सके हम को ,दुख दूजों के हरना चाहिए || देश हित के लिए सदा ,काम हमें करना चाहिए | सही पथ पर चलते हुए ,हमें नहीं डरना चाहिए || सन्तुलित और स
31 जनवरी 2015
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x