दर्द

28 जनवरी 2016   |  अर्चना गंगवार   (265 बार पढ़ा जा चुका है)

जब भी कोई दर्द सीने से
बाहर आया है .....
तुमने कांटो से उसे
खूब सहलाया है
मैंने जख्म सुखाने की
दावा मांगी थी
तुमने जले में
नमक छिडकाया है

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