नारी

13 फरवरी 2016   |  ओम प्रकाश शर्मा   (669 बार पढ़ा जा चुका है)

नारी

अर्ध सत्य तुम, अर्ध स्वप्न तुम, अर्ध निराशा-आशा
अर्ध अजित-जित, अर्ध तृप्ति तुम, अर्ध अतृप्ति-पिपासा,
आधी काया आग तुम्हारी, आधी काया पानी,
अर्धांगिनी नारी! तुम जीवन की आधी परिभाषा।
इस पार कभी, उस पार कभी.....

तुम बिछुड़े-मिले हजार बार,
इस पार कभी, उस पार कभी।
तुम कभी अश्रु बनकर आँखों से टूट पड़े,
तुम कभी गीत बनकर साँसों से फूट पड़े,
तुम टूटे-जुड़े हजार बार
इस पार कभी, उस पार कभी।
तम के पथ पर तुम दीप जला धर गए कभी,
किरनों की गलियों में काजल भर गए कभी,
तुम जले-बुझे प्रिय! बार-बार,
इस पार कभी, उस पार कभी।
फूलों की टोली में मुस्काते कभी मिले,
शूलों की बांहों में अकुलाते कभी मिले,
तुम खिले-झरे प्रिय! बार-बार,
इस पार कभी, उस पार कभी।
तुम बनकर स्वप्न थके, सुधि बनकर चले साथ,
धड़कन बन जीवन भर तुम बांधे रहे गात,
तुम रुके-चले प्रिय! बार-बार,
इस पार कभी, उस पार कभी।
तुम पास रहे तन के, तब दूर लगे मन से,
जब पास हुए मन के, तब दूर लगे तन से,
तुम बिछुड़े-मिले हजार बार,
इस पार कभी, उस पार कभी।

-गोपालदास 'नीरज'

अगला लेख: कृपया ध्यान दें...



Kokilaben Hospital India
08 मार्च 2018

We are urgently in need of kidney donors in Kokilaben Hospital India for the sum of $450,000,00,For more info
Email: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
WhatsApp +91 779-583-3215

अधिक जानकारी के लिए हमें कोकिलाबेन अस्पताल के भारत में गुर्दे के दाताओं की तत्काल आवश्यकता $ 450,000,00 की राशि के लिए है
ईमेल: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
व्हाट्सएप +91 779-583-3215

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 फरवरी 2016
स्
देशव्यापी स्वच्छता अभियान ने जन-जन को इसके प्रति जागरूक किया है I इस दिशा में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी  है I आप अपने आस-पास या रेलों, बसों आदि में यात्रा करते हुए क्या इस अभियान का असर देखते हैं ? यदि नहीं, तो इस दिशा में और क्या करने की आवश्यकता है ?
01 फरवरी 2016
30 जनवरी 2016
फि
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
30 जनवरी 2016
03 फरवरी 2016
ज़ी
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
03 फरवरी 2016
03 फरवरी 2016
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
03 फरवरी 2016
17 फरवरी 2016
माँ मार मार कर खिलाती है ।पत्नी खिला खिला कर मारती है ।(क्षमा करे सभी नही)
17 फरवरी 2016
12 फरवरी 2016
क्
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
12 फरवरी 2016
27 फरवरी 2016
भा
भारतीय नारी एक साथ 10 से 15 परिवार का टेंशन लेके चलती है -.- -.- -.- एक उनका खुद का बाकि टीवी सीरियल और पडोसी का 😜😜😜
27 फरवरी 2016
27 फरवरी 2016
भा
भारतीय नारी एक साथ 10 से 15 परिवार का टेंशन लेके चलती है -.- -.- -.- एक उनका खुद का बाकि टीवी सीरियल और पडोसी का 😜😜😜
27 फरवरी 2016
04 फरवरी 2016
दि
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
04 फरवरी 2016
27 फरवरी 2016
भा
भारतीय नारी एक साथ 10 से 15 परिवार का टेंशन लेके चलती है -.- -.- -.- एक उनका खुद का बाकि टीवी सीरियल और पडोसी का 😜😜😜
27 फरवरी 2016
01 फरवरी 2016
बा
सड़क के बिल्कुल किनारेकोई छोटी-मोटी दुकान या गुमटी जो यातायात को ज़रा भी बाधित न करे, यहाँ तक भी बातबन जाती है लेकिन जब दुकानें, ठेले, खोमचे वाले सीधे सड़क को ही घेर लें तो क्याकहिये I नियम-कानून की कोई तो कमी होगी जो लोग बेहिचक निडर होकर बरसो-बरससड़क-फूटपाथ घेरे रहते हैं I इसके खिलाफ अभियान भी चलते
01 फरवरी 2016
15 फरवरी 2016
हर रह-गुज़र में कहकशाँ छोड़ जाऊँगा,ज़िंदा हूँ ज़िंदगी के निशाँ छोड़ जाऊँगा Iमैं भी तो आज़माऊँगा उसके ख़ुलूस को,उस के लबों पे अपनी फ़ुग़ाँ छोड़ जाऊँगा Iमेरी तरह उसे भी कोई जुस्तुजू रहे,अज़-राह-ए-एहतियात गुमाँ छोड़ जाऊँगा Iमेरा भी और कोई नहीं है तेरे सिवा,ऐ शाम-ए-ग़म तुझे मैं कहाँ छोड़ जाऊँगा Iरौशन र
15 फरवरी 2016
30 जनवरी 2016
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:Always
30 जनवरी 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x