रानी लक्ष्मी बाई

16 फरवरी 2016   |  मदन पाण्डेय 'शिखर'   (294 बार पढ़ा जा चुका है)

शत-शत श्रधांजलि .....

धन्य है बुन्देल भूमि, धन्य  रानी लक्ष्मी बाई 

धन्य  भागीरथी , मोरोपंत  की  छबीली थी,

छूटा  जो सुहाग फिर झाँसी के  सुहाग हेतु,

फिरंगों के संग  होली, लाल रंग खेली थी,

सुन्दर,मुन्दर संग  बादलों सी उड़ गई,-

तेवीस  की उम्र में वो तिरंगे सी पहेली थी,

सिंहनी सी लड़ी,रूह काँप उठी गोरों की  तो,

भारती की ऐसी वीर नार वो अकेली थी I



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जी ॥ सच कहा है ।

रवि कुमार
21 मार्च 2016

उनके जैसी दूसरी न कोई हुई है, न होगी ।

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