गायत्री मन्त्र

17 फरवरी 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

आइये शुरुआत  गायत्री महामंत्र से करें ।

महामंत्र – ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

अर्थ – उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें । वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे ।


अगला लेख: हिंदी करण



अजय बहादुर
18 फरवरी 2016

नमस्ते सेमवाल

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 फरवरी 2016
28 फरवरी 2016
27 फरवरी 2016
वै
लोग कैसे मानेंगे कि हमारी वैदिक संस्कृति महान है ?• जब हम आयुर्वेद की चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, वागभट्ट मुनिकृत अष्टांगहृदयम् आदि ग्रन्थों से सर्जरी चिकित्सा आदि प्रक्रीयाओं का उद्धार करेंगे और समाज में पुनः प्रतिष्ठित करेंगे तब लोग मानेंगे कि वैदिक सभ्यता महान है ।• जब हम परशुराम, शिव, नकुल, इन्द
27 फरवरी 2016
27 फरवरी 2016
शा
“कहते हैं दिल से ज्यादा महफूज जगह नहीं दूनिया में और कोई;फिर भी ना जाने क्यों सबसे ज्यादा यहीं से लोग लापता होते हैं।”
27 फरवरी 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x