गायत्री मन्त्र

17 फरवरी 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद   (101 बार पढ़ा जा चुका है)

आइये शुरुआत  गायत्री महामंत्र से करें ।

महामंत्र – ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

अर्थ – उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें । वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे ।


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