शायरी

27 फरवरी 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद   (284 बार पढ़ा जा चुका है)

“कहते हैं दिल से ज्यादा महफूज जगह नहीं दूनिया में और कोई;


फिर भी ना जाने क्यों सबसे ज्यादा यहीं से लोग लापता होते हैं।”

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