जीवन दीप

01 मार्च 2016   |  काव्यान्जलि   (208 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन दीप

किन उपकरणों का दीपक,

किसका जलता है तेल?

किसकी  वर्त्ति, कौन करता

इसका ज्वाला से मेल?


शून्य काल के पुलिनों पर-

जाकर चुपके से मौन,

इसे बहा जाता लहरों में

वह रहस्यमय कौन?


कुहरे सा धुँधला भविष्य है,

है अतीत तम घोर ;

कौन बता देगा जाता यह

किस असीम की ओर?


पावस की निशि में जुगनू का-

ज्यों आलोक-प्रसार।

इस आभा में लगता तम का

और गहन विस्तार।


इन उत्ताल तरंगों पर सह-

झंझा के आघात,

जलना ही रहस्य है बुझना -

है नैसर्गिक बात !

-महादेवी वर्मा

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