हौसलों का आसमान

08 मार्च 2016   |  आशीष श्रीवास्‍तव   (138 बार पढ़ा जा चुका है)

नियुक्ति-पत्र हाथ में लिए,
खिलखिलाती बेटी से 
माँ ने पूछा-
अब क्या करोगी?
माँ!तुमने समाज की
सारी कुरीतियों, क्रूरताओं के सामने
एक कवच बन कर
मुझे जन्मा, पाला;
अब तुम्हारी शक्ति बनूँगी
ऐसा अप्रत्याशित उत्तर...
आलोक से भर गया 
मन का कोना-कोना
सहसा ही मन
पीछे मुङकर देखने लगा-
वहाँ, जहाँ -
बरामदे में खड़े सभी परिजन,
नर शिशु का 
रूदन सुनने को बेचैन थे
रुदन तो सुना 
पर कन्या का
सबका उत्साह 
दूध के झाग की तरह बैठ गया...
और ....
प्रसवपीड़ा से छटपटाता 
मेरा जिस्म..
अभी स्थिर भी ना होने पाया था
कि एक नन्ही सी जान को 
मेरी बगल में लेटा दिया गया
ओह, मेरी बिटिया! 
मेरे स्त्रीत्व की पूर्णता!
लम्बी-लम्बी साँसें भरता 
वह नन्हा सा जिस्म
मजबूती से बन्द
छोटी-छोटी मुट्ठियाँ
-----आज यही मुट्ठियाँ 
सबल हो मेरे झुकते कन्धों को
सहारा देने को बढ़ आयी हैं
मेरी बच्ची आज समर्थ हो
मातृ-ऋण उतारने को 
तत्पर हो गयी है..
मेरी जान!
तुझे तेरे कदमों में 
तेरी अपनी जमीन और सिर पर
हौसलों का यह आसमान मुबारक हो।


-ममता गुप्ता

अगला लेख: मनोज कुमार जी को २०१५ का दादा साहब फाल्के पुरस्कार



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 मार्च 2016
श्री पी ए  संगमा जी का आज हृदयगति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया है. देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है , उनके जैसा मृदुभाषी , ज्ञानवान और सभी दलों में स्वीकार्य व्यक्ति अब शायद ही इस देश को मिले . प्रभु उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे 1973 में, पीए संगमा मेघालय में प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने।अ
04 मार्च 2016
04 मार्च 2016
ऑस्ट्रेलिया 93% कनाडा 90% अमेरिका 89% चीन 65% #इंडिया  22%  pewrsr.ch/1RX3Iqq
04 मार्च 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x