"दोहा मुक्तक"

15 मार्च 2016   |  महातम मिश्रा   (90 बार पढ़ा जा चुका है)

शीर्षक शब्द -नदी/नदिया /दरिया /जलधारा आदि 

"दोहा मुक्तक"


नदी सदी की वेदना, जल कीचड़ लपटाय

कल बल छल की चाहना, नदिया दर्द बहाय

जलधारा बाधित हुई, दरिया दुर्गम राह

कैसे बिन पानी दई, वंश वेलि बढ़िआय।।


महातम मिश्र

अगला लेख: "गीत- नवगीत"



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 मार्च 2016
"
सादर शुभप्रभात आदरणीय मित्रों, आज आप सभी को सादर निवेदित है एक ग़ज़ल ………….  “गजल”चाहतें चाह बन जाती, अजनवी राह बन जाती मिली ये जिंदगी कैसी, मुकद्दर छांह बन जाती  पारस ढूँढने निकला, उठा बोझा पहाड़ों का बांधे पाँव की बेंड़ी, कनक री, राह बन जाती॥   मगर देखों ये भटकन, यहाँ उन्माद की राहें  मंज़िले मौत टकराती
10 मार्च 2016
07 मार्च 2016
"
 मंच को सादर प्रस्तुत है एक शिवमय रचना, आप सभी पावन शिवरात्री पर मंगल शुभकामना, ॐ नमः शिवाय"कंहरवा तर्ज पर एक प्रयास"डम डम डमरू बजाएं, भूत प्रेत मिली गाएंचली शिव की बारात,  बड़ बड़ात रहिया।नंदी नगर नगर,  घुमे बसहा बयलसंपवा करे फुफकार, मन डेरात रहिया।।गलवा सोहे रुद्राक्ष, बासुकी जी माल भालसथवां मुनि ऋष
07 मार्च 2016
12 मार्च 2016
बु
बुरा न मानों होली है.....जोगीरा सररररर..........होली में हुड़दंग मिला है, जश्न धतूरा भाँग.....रंग गुलाबी गाल लगा है, खूब चढ़ा बेईमान.....जोगीरा सरररररझूम रहा है शहर मुहल्ला, खाय मगहिया पानगली गली में शोर मचा है, माया की मुस्कान......जोगीरा सरररररजोर-शोर से हर सेंटर पर है हल्ला इम्तहानबाप सिखाए अकल नक़ल
12 मार्च 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x