जीवन-मृत्यु

16 मार्च 2016   |  ओम प्रकाश शर्मा   (156 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन-मृत्यु

"जीवन मिलना भाग्य की बात है; मृत्यु होना समय की बात है लेकिन मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहना कर्मों की बात है !"

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