इंसानियत

16 मार्च 2016   |  दीपक श्रीवास्तव   (132 बार पढ़ा जा चुका है)

समाजिक

जगंल में

वजूद की तलाश

यनि कि;

मुर्दो के बीच

आज़िम

इंसान की तलाश

अफ़सुर्दा मौसम में

खुदाई से अन्ज

खुदा ऐहतमाम कर

इंसानियत को

बरक्कत दे

बरक्कत दे

और;

बरक्कत दें !!

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