आओ बदल ले खुद को थोड़ा

19 मार्च 2016   |  जेपी हंस   (191 बार पढ़ा जा चुका है)

बड़ी-बड़ी हम बातें करते,

पर कुछ करने से हैं डरते,

राह को थोड़ा कर दें चौड़ा,

आओ बदल लें खुद को थोड़ा ।


ख्वाब ये रखते देश बदल दें,

चाहत है परिवेश बदल दें,

पर औरों की बात से पहले,

क्यों न अपना भेष बदल दें ।


चोला झूठ का फेंक दें आओ,

सत्य की रोटी सेंक लें आओ,

दौड़ा दें हिम्मत का घोड़ा,

आओ बदल लें खुद को थोड़ा ।


एक बहाना है मजबूरी,

खुद से है बदलाव जरुरी,

औरों को समझा तब सकते,

खुद सब समझो बात को पूरी ।


भीड़ में खुद को जान सके हम,

स्वयं को ही पहचान सकें हम,

अहम को मारे एक हथौड़ा,

आओ बदल लें खुद को थोड़ा ।


दो चेहरे हैं आज सभी के,

बदल गए अंदाज सभी के,

अपनी दृष्टि सीध तो कर लें,

फिर खोलेंगे राज सभी के ।


पथ पर पग पल-पल ही धरे यूँ,

जब-जब जग की बात करे यूँ,

क्या कर जब तक दंभ न तोड़ा,

आओ बदल ले खुद को थोड़ा ।


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