समाजवाद

21 मार्च 2016   |  दीपक श्रीवास्तव   (124 बार पढ़ा जा चुका है)

समाजवाद

एक

वेश्यालय की

चौखट पर

मजमा लगाते है रोज़

समाजवादी;

बिना किसी वर्ग भेद के

बिना किसी जाति भेद के

बिना किस धर्म भेद के

बिना किसी पन्थ भेद के!

एक

मदिरालय की

चौखट पर

मजमा लगाते है रोज़

समाजवादी;

बिना किसी वर्ग भेद के

बिना किसी जाति भेद के

बिना किस धर्म भेद के

बिना किसी पन्थ भेद के!

एक

मंदिर की

चौखट पर

मजमा लगाते है रोज़

समाजवादी;

बिना किसी वर्ग भेद के

बिना किसी जाति भेद के

बिना किस धर्म भेद के

बिना किसी पन्थ भेद के!

वास्तव में,

असली समाजवाद;

रोज़;

फलता-फूलता है

यहाँ !!

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