हमारा नया वर्ष आया है।

23 मार्च 2016   |  जेपी हंस   (128 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारा नया वर्ष आया है।

आत्मीयता का विश्वास लेकर ।


मधुरता का पैगाम लेकर ।


दरिद्रता का अन्न लेकर ।


आज धरा पर आया है ।


हमारा नया वर्ष आया है ।


            नवजीवन में मुस्कुराहट लेकर ।


            खिले मन सा सुमन लेकर ।


            वनिता का सिंदूर लेकर ।


            भाई-भाई का प्रेम लेकर ।


            आज धरा पर आया है ।


            हमारा नया वर्ष आया है ।


विषम समाज की समता लेकर ।


दीर्घायू जनतंत्र की कामना लेकर ।


झगड़े-फसाद का कवच लेकर ।


अक्षय भंडार का वसुंधरा लेकर ।


आज धरा पर आया है ।


हमारा नया वर्ष आया है ।


            नव रश्मि में उजाला लेकर ।


            निर्बल का निराकरण लेकर ।


            धवल नवल सा प्रभात लेकर ।


            चेहरे का चमकी मुस्कान लेकर ।


            आज धरा पर आया है ।


            हमारा नया वर्ष आया है ।


सुरक्षा का सुदृढ़ आधार लेकर ।


मधुर बंधुत्व का विस्तार लेकर ।


आतंकी हमले से मुक्ति का प्रचार लेकर ।


अमन-चैन का उपहार लेकर ।


आज धरा पर आया है ।


हमारा नया वर्ष आया है ।


              -जेपी हंस





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