गजल

28 अप्रैल 2016   |  कुमार रोहित राज   (118 बार पढ़ा जा चुका है)

गजल सा हमको भी गाओ तो कोई बात बने 

करीब होठो के आओ तो कोई बात बने 

नही बुझा सका सावन भी प्यास को मेरी 

तिशनगी तन की बुझाओ तो कोई बात बने 

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रवि कुमार
29 अप्रैल 2016

भाई बात बन तो जनि ही चाहिए, लिखा ही कुछ ऐसा है .

जैसी सबकी दुआ होगी

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