भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा

07 मई 2016   |  अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'   (222 बार पढ़ा जा चुका है)

भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा


भूख प्यास मजबूरी का आलम देखा,

जब से होश संभाला केवल ग़म देखा। 


नहीं मिला ठहराव भटकते क़दमों को,

जिसके भी मन में झाँका बेदम देखा। 


वादों और विवादों की तक़रीर सुनी,

जख्मीं होंठों पर सूखा मरहम देखा। 


बिना किये बरसात बदरिया चली गई, 

कई मर्तबा ऐसा भी मौसम देखा। 


सर पे छप्पर नहीं मह्ज नीला अम्बर था,

उन आंखों में स्वाभिमान हरदम देखा। 


सेवा में मादर-ए-वतन की सरहद पर,

उस जवान ने अपना ही घर कम देखा।   


जिनकी हुंकारों से दुश्मन काँप उठा हो,

उन आवाजों में दर्द आँख को नम देखा। 


तार-तार हो गया गिरेबां घायल मन,

 उनके हाथों में अकसर  परचम देखा। 



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अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'

संपर्क -- + ९१९५५५५४८२४९ ,मैं अपने विद्यार्थी जीवन से ही साहित्य की विभिन्न गतिविधियों में संलग्न रहा|आगरा वि.वि.से लेखा शास्त्र एवं हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की ,फिल्म निर्देशन व पटकथा लेखन में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की |सर्वप्रथम मुंबई को अपना कार्यक्षेत्र बनाया |लेखक-निर्देशक श्री गुलजार के साथ सहायक फिल्म निर्देशक के रूप में कार्य किया|पटकथा लेखन में श्री कमलेश्वर के साथ टी.वी.के लिए कार्य कर दिल्ली वापस लौट आया|तत्पश्चात दिल्ली दूरदर्शन में दूरदर्शन निदेशक डॉ.जॉन चर्चिल,श्री प्रेमचंद्र आर्या के साथ कार्य किया|साथ ही साथ आकाशवाणी आगरा,दिल्ली,नजिवाबाद केन्द्रों से काव्यपाठ एवं नाटक,एकांकी के लिए कार्य किया |२००२ से अपना व्यवसाय करते हुए साहित्यक कार्यक्रमों में मेहमान वक्ता-प्रवक्ता एवं दिग्दर्शक के रूप में स्वतंत्र रूप से सेवारत हूँ । संपर्क - ९१९५५५५४८२४९

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