आरक्षण नीति

02 जून 2016   |  विष्णु द्विवेदी   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

 

औरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना मेरी आदत नहीं

मगर जो गलत है उस पर चोट करने की फितरत है ~विष्णु~

टीना दाबी ने टॉप किया ठीक है ,इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि,परीक्षा के किसी चरण में उनसे ज्यादा अंक लाने वालों की संख्या तिहाई में हो ,जो कमियां रहीं होगी वो ट्रेनिंग में चली जाएंगी । पर इस बात पर खुश होना कि, किसी आधार पर पिछड़े हुए का विकास आरक्षण की वजह से हो रहा है कहते हुए टीना से जोड़ना कहीं की होशियारी नहीं हैं। ये वो अन्तिम आदमी नहीं हैं जिसके लिए आरक्षण की बात गांधी और अम्बेडकर ने की होगी जो नीति समाजवाद के आधार पर बनाई गई थी वो पूँजीवाद के इर्द गिर्द नजर आती है। उस समय से अब तक देश की पृष्ठभूमि बदल चुकी अतः जरूरी है इस बार मंथन की। भूत पर रोना इतना जायज भी नहीं वैसे भी दुनिया में Oscar और Nobel सम्मान दोनों को गठियाने वाला इकलौता बंदा George Bernard Shaw इतनी खूबसूरती से कहता है कि,भूत इतिहास है , भविष्य रहस्य है अतः वर्तमान में रहो। मौजूं है कि आरक्षण नीति पर चर्चा होनी चाहिए वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रखते हुए।

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पहले तो बांटा मजहब के नाम पर हमें
फिर भाषा प्रांत जाति के आधार पर हमें
फिर भी न मन भरा तो ये अब देख रहें हैं
आरक्षण से और टुकड़ों में बाँट कर हमें

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