किसान का दर्द

07 जून 2016   |  मधुसूदन दीक्षित   (166 बार पढ़ा जा चुका है)

किसान अपने खेत की तैयारी के बाद बीज के लिए सरकारी बीज गोदाम की ओर दो लाभ प्राप्त करने की उम्मीद से जाता है।एक सरकारी अनुदान और फाउंडेशन सीड में कम बीमारी का दावा।मगर वास्तव में उसे दोनों में छलाबा ही मिलता है

न तो कोई अनुदान की गारंटी है और न ही उच्च गुणवत्ता के बीज की।खरीफ में धान के बीज की पौध डाली,बीज का जमाव कम होता देख जिला क्र्षि अधिकारी से संपर्क किया परंतु कोई हल न निकलता देख प्राइवेट दुकान से कुछ बीज खरीदना पड़ा।ऐसे में किसान स्वयं को ठगा सा महसूस करता है।खेती और किसानों की तस्वीर बदलने का दावा करने वाले कब उसकी व्यथा जानने धरातल पर आयेगे।

अगला लेख: गन्ना बीज की शीतकालीन बुबाई हेतु अगेती नस्ल का बीज देकर खेल में नर्सरी तैयार कराईं मगर अनुदान आज तक नहीं मिला।आखिर अनुदान जाता कहाँ है?


किसानों की बुनियादी सुविधाओं और समस्याओं के समाधान हेतु किसान हेल्पलाइन नम्बर लगता ही नहीं।व्यस्त बताकर सिस्टम बिजी स्क्रीन पर लिखा हुआ आता है।कैसे सुधरेगा भारी भरकम बजट वाला विभाग।बेशुमार कर्मचारियों की फौज किसानों के किस काम की।

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