बेटी बोझ नहीं

10 जून 2016   |  प्रिंस सिंघल   (277 बार पढ़ा जा चुका है)

पिताजी की मृत्यु को एक महीना ही हुआ था. शान्तनु के सिर पर ही बहिन की शादी और घर की जिम्मेदारी का बोझ आ

गया.  पिताजी की बीमारी में भी बहुत खर्च हो चुका था. घर के हालात को माँ समझती थी, लेकिन बेबस थी, फिर शान्तनु के भी तो दो लड़कियाँ थी, जिनको पढ़ाना - लिखाना और उनके ब्याह के लिए भी कुछ जोडना. सब कुछ देखकर घबरा गया शान्तनु और चिड़चिड़ाने लगा.

उस दिन ऑफिस जाने से पहले माँ से कह रहा था, अब मै क्या करुँ. माँ और बहिन को दोषी साबित कर झगड़ रहा था, कहाँ से करुँ इसका ब्याह. मेरे स्वयं के भी दो लड़कियाँ है. पिताजी ने जो रुपया जोड़ा था, उन्ही की बीमारी में सब ख़त्म हो चुका है. माँ और बहिन दोनों निगाहें झुकाये सब सुन रही थी, कि द्वार पर डाकिया बहिन कि IAS में सफलता का फरमान दे गया. माँ और बहिन की आँखों में जीत की ख़ुशी दौड़ने लगी और शान्तनु निशब्द सा

खड़ा सोच रहा था, पिताजी जाने से पहले ही पढ़ा - लिखा कर अपनी बेटी को इस काबिल बना गए कि उनके जाने के बाद भी वो किसी पर बोझ न बने.

अगला लेख: जीने की राह



Gajanan Banduji Jadhaw
06 अप्रैल 2017

बेटि बेटा हो समान तौही बढेगा सम्मान

Gajanan Banduji Jadhaw
06 अप्रैल 2017

बेटि बेटा हो समान तौही बढेगा सम्मान

सृष्टि
11 जून 2016

सही kaha
कहा

kratika
10 जून 2016

अब बेटी भी अपने पैरों पर खड़ी होकर देश की तरक्की में साथ देती

neetu
10 जून 2016

सच में बेटी बोझ नहीं

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 जून 2016
यो
योग भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण  वीध्या है. योग से हमारा सर्वांगीण, शरीरिक, मानसिक, बौद्धिक, व्यवहारिक विकास होता है. योग जीवन जीने की कला है, जिसे सीखकर व्यक्ति स्वस्थ रहता है, जीवन में सफल होता है. जीवन दिव्य बनाता है और अपना भाग्य बदलने में सक्षम होता है. योग सर्वांगीण विकास करने वाली कला ह
21 जून 2016
24 जून 2016
प्
प्रेम किसी के लिये ज़िम्मेदारी है तो किसी के लिये वफादारी. किसी के लिये प्रेम लालसा है तो किसी की वासना, कोई अपनी सुविधा देखकर प्रेम करता है तो कोई आपसी योग्यता को देखकर. प्रेम की गहराई नापना असंभव है. लोग किसी महिला और पुरुष के संबंध को प्रेम मानते है, तो क्या एक माँ का अपने पुत्र या पुत्री के प्रति
24 जून 2016
31 मई 2016
रामपुर गांव की एक गली में एक बुढ़िया रहती थी . बुढ़िया की उम्र लगभग 80 वर्ष से कम नही थी.  कहने को तो बुढ़िया के 2 बटे थे,  लेकिन दोनों ही बुढ़िया को गाँव में मरने के लिये अकेली छोड़ दूर शहर में जा बसे. बुढ़िया घूम घूम कर अपने लिये भोजन इक्क्ट्ठा करती और अपना पेट भर कर सो जाती. उसका जीवन निरर्थक था. सिवाय
31 मई 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x