पानी बचाना चाहिए

11 जून 2016   |  सुशील कुमार शर्मा   (113 बार पढ़ा जा चुका है)

पानी  बचाना चाहिए

फेंका बहुत पानी अब उसको बचाना चाहिए।

सूखे जर्द पौधों को अब जवानी चाहिए।

वर्षा जल के संग्रहण का अब कोई उपाय करो।

प्यासी सुर्ख धरती को अब रवानी चाहिए।

लगाओ पेड़ पौधे अब हज़ारों की संख्या में।

बादलों को अब मचल कर बरसना चाहिए।

समय का बोझ ढोती शहर की सिसकती नदी है।

इस बरस अब बाढ़ में इसको उफनना चाहिए।

न बर्बाद करो कीमती पानी को सड़कों पर।

पानी बचाने की अब एक आदत होनी चाहिए।

रास्तों पर यदि पानी बहाते लोग मिलें।

प्यार से पुचकार कर उन्हें समझाना चाहिए।

"पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून "

हर जुबां पर आज ये कहावत होनी चाहिए।


अगला लेख: दहकता बुंदेलखंड



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 जून 2016
खे
खेती में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से कहीं, 07 वर्ष की लड़कियों में माहवारी शुरू हो रही है, तो कहीं मनुष्यों के सेक्स में ही परिवर्तन हुआ जा रहा है। विश्व बैंक के अनुसार दुनिया में 25 लाख लोग प्रतिवर्ष कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के शिकार होते हैं, जिसमें से 05 लाख लोग काल के गाल में समा जाते हैं। फ
15 जून 2016
05 जून 2016
अनुत्तरित प्रश्न एक जंगल था ,बहुत प्यारा था सभी की आँख का तारा था। वक्त की आंधी आई, सभ्यता चमचमाती आई। इस सभ्यता के हाथ में आरी थी। जो काटती गई जंगलों को बनते गए ,आलीशान मकान ,चौखटें ,दरवाजे ,दहेज़ के फर्नीचर। मिटते गए जंगल  सिसकते रहे पेड़ और हम सब देते रहे भाषण बन कर मुख्य अतिथि वनमहोत्सव में। हर आर
05 जून 2016
13 जून 2016
कि
किसान चिंतित हैसुशील शर्माकिसान चिंतित है फसल की प्यास से ।किसान चिंतित है टूटते दरकते विश्वास से।किसान चिंतित है पसीने से तर बतर शरीरों से।किसान चिंतित है जहर बुझी तकरीरों से।किसान चिंतित है खाट पर कराहती माँ की खांसी से ।किसान चिंतित है पेड़ पर लटकती अपनी फांसी से।किसान चिंतित है मंडी में लूटते लुट
13 जून 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x